
नई दिल्ली। भारत की सीमा(India’s border) एक तरफ चीन(On one side, China) तो दूसरी तरफ पाकिस्तान(Pakistan) से लगती है. बीजिंग और इस्लामाबाद(Beijing and Islamabad) की ओर से भारत(India) में अस्थिरता फैलाने(Spreading instability) की साजिश रचने का इतिहास पुराना है. दोनों देशों की तरफ से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और पूर्वोत्तर में उग्रवादियों को शह दी जाती रही है. भारत की तरफ से इन समस्याओं से निपटने के लिए लगातार प्रयास किया जाता रहा है.
भारत आतंकवाद(India terrorism) और उग्रवाद(Extremism) से निपटने के लिए समय-समय पर अपनी शर्तों पर एक्शन लेता रहा है. भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकवादियों के कई शिविरों को तबाह किया है. बालकोट एरियल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है. लेकिन, पाकिस्तान अकेला देश नहीं है, जिसके अंदर घुसकर भारतीय फौज ने आतंकवादियों को नेस्तनाबूद किया है. इंडियन आर्मी ने साल 2025 में म्यांमार में प्रिसिजन स्ट्राइक कर कई उग्रवादियों को मार गिराया था और उनके अड्डे को ध्वस्त कर दिया था. इंडियन आर्मी के जवानों के इस अद्भुत शौर्य को पूरे देश ने सलाम किया है. 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इस कवर्ट ऑपरेशन का हिस्सा रहे जवान को शौर्य चक्र दिया गया है. इसके साथ ही पहली बार म्यांमार में चलाए गए कवर्ट प्रिसिजन स्ट्राइक की बात को स्वीकार किया गया है.
शौर्य चक्र से जुड़े एक आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (साइटेशन) के जरिए भारतीय सेना द्वारा जुलाई 2025 में म्यांमार के भीतर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का पहली बार औपचारिक खुलासा हुआ है. यह ऑपरेशन 11 से 13 जुलाई के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया था. अब इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकर किया गया है. 21 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) के लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को इस साहसिक अभियान की योजना बनाने और नेतृत्व करने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है. साइटेशन के अनुसार, उनके नेतृत्व में की गई सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकी ठिकाने को नष्ट किया गया, जिसमें 9 हथियारबंद कैडरों को मार गिराया गया. इनमें एक कुख्यात राष्ट्रविरोधी संगठन के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे.
जगह और टारगेट का खुलासा नहीं
हालांकि, सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन यह घटनाक्रम उस समय सामने आए दावों से मेल खाता है, जब जुलाई 2025 में प्रतिबंधित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) (उल्फा-I) ने अपने तीन शीर्ष नेताओं के म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारे जाने की बात कही थी. संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया. ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय भारतीय सेना ने किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस ऐसी किसी कार्रवाई में शामिल नहीं थी. उल्फा-I का विरोधी गुट सशस्त्र संघर्ष के जरिए संप्रभु असम की स्थापना का दावा करता रहा है और वह भारत-म्यांमार की लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा के पास कई मोबाइल शिविरों से संचालन करता है.
कर्नल घाटगे का साहस
शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए केवल यह कहा गया है कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे. इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की असाधारण नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक सूझबूझ और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है. सेना के अनुसार, उनके नेतृत्व में मिशन को बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुलासा भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है, खासकर ऐसे समय में जब पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं. हालांकि, सरकार और सेना अब भी इस तरह के अभियानों पर सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन के अस्तित्व की पुष्टि हो सकी है. यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय अभियानों की भूमिका को भी रेखांकित करता है, जिनका उद्देश्य सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना है, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved