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इंदौर: गले काटने के साथ चाइनीज मांझे ने बिजली कम्पनी को भी पहुंचाया बड़ा नुकसान, अब पुलिस का ‘ड्रोन प्रहार’

January 14, 2026

  • आज ड्रोन सहित रहेगी पैनी निगाह

इंदौर। आज मकर सक्रांति पर शहरभर में पतंगबाजी के कई आयोजन होंगे। गली-मोहल्ले, उद्यानों में सुबह से पतंग उडऩा शुरू हो गई, तो उसके साथ ही पुलिस प्रशासन की टीम चाइनीज मांझे की धरपकड़ में भी जुटी है। गले कटने के कारण कई मौतें हो गईं, तो कुछ गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिसके चलते दो पहिया वाहनों पर रॉड लगाने का अभियान भी कल पुलिस ने शुरू करवाया। कलेक्टर नेभी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए। बिजली कम्पनी का कहना है कि चाइनीज मांझे से उसे भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा और लगभग 13 बार बार तो विद्युत आपूर्ति बाधक हुई।

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में एक विशेष जागरूकता अभियान चला रही है। एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंगों के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं।


  • अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया गया, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े। दरअसल, चाइनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर दिया गया।

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