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इंदौर  : मौतें गंदे पानी से या, जहरीले पानी से

January 24, 2026

मौतों का आंकड़ा 27 तक पहुंचा, दूषित पानी से आज तक कहीं भी इतनी मौतें कहीं नहीं हुईं, पूरी सरकारी मशीनरी हैरान

टंकी के पानी में क्लोरिन की मिलावट…पोटेशियम क्लोराइड या किसी अन्य केमिकलसे पानी के जहरीले होने की आशंका

सिर्फ दो पोस्टमार्टम हुए, अब विसरा परीक्षण रिपोर्ट का इंतजार
महापौर-कलेक्टर सहित अन्य अफसरों का भी मानना, कहीं तो कुछ गड़बड़ है
अभी गांधी नगर के बाद महू में भी मिले कई मरीज, मगर २४ घंटे में ही अधिकांश हो गए स्वस्थ
टंकी पर पदस्थ कर्मचारी से कड़ी पूछताछ भी की थी
६ माह के मासूम की भी हुई मौसम, जिसे सिर्फ दूधमें थोड़ा सा पानी मिलाकर पिलाया था
नमूनों की फोरेंसिक और केमिकल जांच नहीं करवाई

इंदौर, राजेश ज्वेल
अगाथा क्रिस्टी (Agatha Christie) के उपन्यासों की तरह भागीरथपुरा (Bhagirathpura) में हुई इतनी मौतों की मिस्ट्री, यानी गुत्थी सुलझाने के प्रयासों में अब शासन-प्रशासन जुटा है। देश-दुनिया (Country and the world) में आज तक एक ही जगह इतनी मौतें कभी नहीं हुईं। भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा हर रोज बढ़ रहा है और कल रात तक 27 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि इनमें से कई मौतें अन्य बीमारियों से बताई गई हैं। अभी हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा उठा कि आखिर इतनी मौतों का कारण क्या है। कहीं कोई केमिकल तो पानी में नहीं मिल गया। जिस टंकी से पानी बंटा उसमें पोटेशियम क्लोराइड या अन्य केमिकल की मिलावट से पानी जहरीला तो नहीं बन गया। अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की गूंज सुनाई देने लगी है। महापौर, कलेक्टर से लेकर सभी आला अफसरों का मानना है कि कहीं तो कुछ गड़बड़ है।



  • दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में एकाएक भागीरथपुरा में दूषित पानी से मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, जो अभी भी जारी है। 450 से अधिक रहवासी बीमार हुए, जिनमें से 27 की मौत अब तक हो चुकी है। देश और दुनियाभर में इस बात को लेकर बवाल मचा कि आखिर पीने का पानी इतना जहरीला कैसे हो गया। अमूमन दूषित पानी या खाने से लोग बीमार पड़ते रहते हैं, लेकिन कभी भी इतनी बड़ी संख्या में मौतें नहीं होतीं। अभी गुजरात के गांधीनगर में भी दूषित पानी से 150 से अधिक लोग बीमार हुए, जिनमें 100 से अधिक तो बच्चे भी शामिल रहे, मगर किसी की मौत की खबर नहीं आई। इसी तरह अभी इंदौर के पास महू में भी 24 घंटे पहले 30 से अधिक लोग इसी तरह गंदे पानी के सेवन से बीमार हुए और ताबड़तोड़ कलेक्टर शिवम वर्मा भी पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग का अमला जुटा। अस्पतालों में भर्ती भी कराया, मगर अगले ही कुछ घंटों में अधिकांश लोग तेजी से स्वस्थ भी होने लगे और एक भी मौत इस मामले में भी नहीं हुई। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर भागीरथपुरा में ऐसा क्या हुआ कि दूषित पानी इतना जहरीला बन गया कि 6 माह के मासूम से लेकर बुजुर्गों की मौतें निरंतर होती रहीं। इस बारे में कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि घटनाक्रम इतनी तेजी से घटा कि ज्यादातर शवों का अंतिम संस्कार भी जल्दी हो गया और सिर्फ 2 के ही पोस्टमार्टम करवाए जा सके। इनकी रिपोर्ट के परीक्षण के अलावा जो विसरा लिया गया उसकी भी जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। शासन ने उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की है। इस बात की गुत्थी सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं कि कहीं अधिक मात्रा में मिलाए गए पोटेशियम क्लोराइड या किसी अन्य केमिकल की मिक्सिंग तो नहीं हो गई। हालांकि अभी तक पानी के नमूनों की जो जांच रिपोर्ट आई उसमें ऐसे किसी केमिकल के प्रमाण नहीं मिले और डायरिया, हैजा फैलाने वाले ई-कोलाई सहित अन्य बैक्टीरिया ही पाए गए हैं। दूसरी तरफ सूत्रों का यह भी कहना है कि क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला को भी इस मामले की जानकारी है कि अधिक मात्रा में क्लोरिन मिल गया था और जलप्रदाय रोकने के भी प्रयास किए गए थे। इस बारे में जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव से पूछा गया तो उनका कहना है कि इस तरह की शंका और जानकारी उनके समक्ष भी आई और उन्होंने अपने स्तर पर इसकी पड़ताल भी करवाई, मगर ठोस वजह सामने नहीं आ सकी। चिकित्सकों से भी चर्चा की गई। हालांकि महापौर का मानना है कि इस पूरे मामले की फोरेंसिक, केमिकल या अन्य तरह की उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए, क्योंकि यह वाकई आश्चर्य का विषय है कि दूषित पानी से इतनी मौतें कैसे संभव है। इस मामले में चिकित्सकों का कहना है कि पानी में अगर क्लोरिन की मात्रा बढ़ जाती है तो उससे उन लोगों को नुकसान हो सकता है, जो किडनी, लिवर, फेफड़े या अन्य गंभीर बीमारियों से पहले से पीडि़त हैं। अभी जो कुछ मौतें हुई हैं उनमें कई लोग इस तरह की गंभीर बीमारियों से पीडि़त भी पाए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी का भी कहना है कि कई मरीजों में पुरानी टीबी, एंजियोप्लास्टी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप से लेकर किडनी सहित अन्य बीमारियां भी पाई गई हैं। कुल मिलाकर भागीरथपुरा कांड की सघन जांच की जरूरत है, जो कि क्राइम ब्रांच या एसआईटी के माध्यम से भी शासन द्वारा कराई जा सकती है।

    22 से 25 दिसम्बर के बीच बंटे पानी ने किया अधिकांश को बीमार
    सूत्रों का यह भी कहना है कि भागीरथपुरा में जो दूषित पानी बंटा उससे 22 से 25 दिसम्बर के बीच सबसे अधिक लोग बीमार हुए और उसी के बाद जब एक साथ इतने मरीज अस्पताल पहुंचे तब हल्ला मचा। इस संबंध में पानी में अधिक मात्रा में पोटेशियम क्लोराइड मिलाने और जलप्रदाय रोकने की बात भी हुई। क्षेत्रीय पार्षद को भी इस बारे में जानकारी थी और जल वितरण से जुड़े एक कर्मचारी से भी इस संबंध में कड़ाई से पूछताछ की गई थी। मगर चूंकि कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए, इसलिए इस दिशा में जांच आगे नहीं बढ़ सकी और तब तक मंत्री के विवादित बयान और अन्य कारणों के चलते यह मुद्दा राष्ट्रव्यापी बन गया और फिर पूरी सरकारी मशीनरी उसी में जुट गई। मगर अब आला अफसरों का मानना है कि इस मामले की फोरेंसिक, केमिकल सहित अन्य गंभीर जांच होना चाहिए, ताकि यह पता लग सके कि इतनी मौतें कैसे हुईं।

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