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इंदौर: 10 करोड़ के रो-हाउसों पर अवैध कब्जे, अभी 45 करवाए खाली

April 11, 2026

  • प्राधिकरण की योजना 94 सेक्टर एच मूसाखेड़ी में चलाया अभियान, 16 साल पहले 550 बनाए थे, खाली पड़े मकानों में होते गए लगातार कब्जे

इंदौर। एक तरफ प्राधिकरण एमआर-11 और एमआर-12 के लिए व्यवस्थापन के तहत खाली फ्लैट ढूंढ रहा है, दूसरी तरफ उसके खुद के बनाए हुए रो-हाउसों में पिछले कई वर्षों से अवैध कब्जे हैं। मूसाखेड़ी रिंगरोड स्थित योजना 94, सेक्टर एच में 16 साल पहले प्राधिकरण ने 550 छोटे रो-हाउस निम्र और गरीब परिवारों के लिए बनाए थे, जिनमें से अधिकांश आबंटित भी कर दिए और कई आवंटन समय पर किश्तें ना भरने और राशि ना चुकाने के चलते निरस्त भी हुए। मगर कब्जे बरकरार रहे। बल्कि खाली पड़े रो-हाउसों पर भी अवैध रूप से कई परिवार रहने लगे। अब कल प्राधिकरण ने अभियान चलाकर इन 10 करोड़ रुपए मूल्य के रो-हाउसों को मुक्त कराने की कार्रवाई पुलिस, प्रशासन, निगम अमले की सहायता से की।

अभी प्राधिकरण को एमआर-11 में बाधक बस्ती के अलावा एमआर-12 में रविदास नगर सहित अन्य बाधाओं को हटाना है। मगर समस्या यह है कि यहां रहने वाले परिवारों को अन्य कहीं शिफ्ट करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राधिकरण हालांकि बहुमंजिला इमारतों का निर्माण करवा रहा है, ताकि उनमें बनने वाले फ्लेटों में इस तरह के विस्थापितों को बसाया जा सके। मगर उसके निर्माण में समय लगेगा। तब तक प्राधिकरण निगम के खाली पड़े फ्लैटों के अलावा अन्य वैकल्पिक उपाय सोच रहा है। वहीं मूसाखेड़ी के पास बनाए आवासीय प्रकोष्ठों को लम्बे समय बाद मुक्त कराने की कार्रवाई कल से शुरू की गई।


  • प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया कि कल लगभग 45 रो-हाउस यानी प्रकोष्ठों पर अनाधिकृत कब्जे प्रशासन, पुलिस, निगम और प्राधिकरण अमले ने संयुक्त मुहिम चलाकर कब्जे हटवाए और कब्जा प्राप्त किए। इस योजना में लगभग 8 ब्लॉक शामिल है, जिसमें से ब्लॉक ई, एफ, जी, एच के रो-हाउसों में मुहिम चलाई गई। अब इसी तरह ब्लॉक ए, बी, सी, डी में भी जो अनाधिकृत कब्जे हैं उन्हें हटाया जाएगा। इन रो-हाउसों को सालों पूर्व प्राधिकरण ने बनवाया था और लगभग 550 प्रकोष्ठों का आबंटन भी किया गया। मगर विभिन्न कारणों से कई आवंटन निरस्त हुए और प्रकोष्ठ खाली पड़े रहे, जिन पर अवैध कब्जे होते रहे। पिछले दिनों सर्वेक्षण और चिन्हांकन कर कल इन सम्पत्तियों को मुक्त कराया। एक रो-हाउस की कीमत 10 से 12 लाख रुपए से कम नहीं है। अब हालांकि प्राधिकरण तय करेगा कि इन्हें बेचा जाना है अथवा व्यवस्थापन के तहत कई परिवारों को शिफ्ट किया जा सकता है। लगभग 80 प्रकोष्ठ इस तरह प्राधिकरण को प्राप्त हो जाएंगे। सीईओ डॉ. झाड़े के मुताबिक भविष्य में फिर से इस तरह के कब्जे ना हों, उसके लिए भी आवश्यक निर्देश अधिनस्थ अधिकारियों को दिए हैं। साथ ही अन्य योजनाओं में भी ऑडिट करने और कब्जे हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी।

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