
इंदौर। अमूमन जैन साधु-संतों के पास पैसा नहीं होता, लेकिन दो जैन साध्वियों ने दान में मिले पैसों को इकट्ठा कर बैंक में जमा कराया और उनके बैंक खाते से 24 लाख रुपए साइबर ठगों ने उड़ा दिए। मामला राज्य साइबर सेल पहुंचा। पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज कर लिया है। बताते हैं कि खाते ब्लॉक करवाए गए हैं।
दो दिन पहले तिलकनगर क्षेत्र में विहार कर रहीं तीन जैन साध्वियां राज्य साइबर सेल पहुंचीं और एसपी सव्यसाची सराफ से संपर्क किया। उन्होंने एसपी को बताया कि वे मोबाइल का उपयोग कम से कम करती हैं। रात में उन्होंने किसी काम के चलते मोबाइल ऑन किया था। उसके कुछ देर बाद उनको बैंक से मैसेज आया कि उनके खाते से अलग-अलग किस्तों में 24 लाख रुपए निकाले गए हैं, जबकि उनका कहना था कि उन्होंने न तो कोई ओटीपी दिया न ही कोई जानकारी दी। इसके बाद भी पैसे निकल गए। इस पर एसपी के आदेश पर राज्य साइबर सेल ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
एसपी ने बताया कि साध्वियों का कहना है कि यह राशि उनको दान में मिली हुई है। इसमें से कुछ राशि की उन्होंने एफडी कर रखी थी। यह खाता छिंदवाड़ा में है। चूंकि वे इंदौर में तिलकनगर क्षेत्र में विहार कर रही थीं, इसलिए इंदौर में केस दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन एफडी तोडऩे के लिए ओटीपी आता है, लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते अब बैंक से संपर्क कर जानकारी मांगी गई है। जांच में पता चला है कि यह राशि एसबीआई के योनो ऐप के माध्यम से ट्रांसफर की गई है। इसके चलते यह पैसा जिस खाते में गया है उसे ब्लॉक करवाया जा रहा है।
जैन संतों के पास पैसा… मोबाइल भी नहीं रखते
जैन साधु-संत त्यागी, तपस्वी होते हैं। वो मोह-माया और धन से तो दूर रहते ही हैं, यहां तक कि मोबाइल रखने वालों से भी दूर रहते हैं। जैन संत उस व्यक्ति से गोचरी यानी भोजन नहीं लेते, जिसके पास मोबाइल हो। ऐसे में साध्वियों के पास 24 लाख की धनराशि जमा होना और पास में मोबाइल होना बड़ी बात मानी जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह धन कब जमा कराया। हालांकि जैन धर्मावलंबी वास्खेप, यानी आशीर्वाद देते समय कुछ राशि समाज के कामों के लिए संतों को देते हैं।
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