
इंदौर, विकाससिंह राठौर। मध्यप्रदेश में शराब दुकानों की कीमत 20त्न बढ़ाने के बाद फायदे की दुकानें तो बिक चुकी हैं, लेकिन 40त्न से ज्यादा दुकानें ऐसी हैं, जिन्हें अब तक कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। इसे देखते हुए शासन ने तीन दिन पहले 4त्न कीमत कम करते हुए टेंडर बुलाए थे, लेकिन इससे भी कोई फायदा नहीं हुआ और इंदौर सहित अधिकांश जिलों में एक भी टेंडर नहीं आया। इसे देखते हुए अब सरकार ने दुकानों की कीमत 10त्न कम करने का निर्णय लिया है। आज से इच्छुक व्यापारी तय कीमत से 10त्न कम पर बोली लगा सकेंगे। कल इन टेंडरों को खोला जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नई आबकारी नीति 2026-27 में प्रदेश की सभी 3553 शराब दुकानों की कीमत 20त्न बढ़ाई गई है। इसके बाद 2 मार्च से नीलामी जारी है, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आधी दुकानें भी नहीं बिक पाई हैं। वहीं राजस्व लक्ष्य की बात करें तो अब भी 42त्न राजस्व मिलना बाकी है। दूसरी ओर इस प्रक्रिया को हर हाल में 31 मार्च से पहले खत्म करना है। बढ़ी हुई कीमतों में दुकानें खरीदने में व्यापारियों की अरुचि देखते हुए सरकार ने पहले 4त्न कम कीमत पर बोली लगाने का विकल्प देते हुए टेंडर बुलाए थे, जिन्हें कल खोला गया, लेकिन इंदौर सहित प्रदेश के ज्यादातर जिलों में इसमें एक भी टेंडर नहीं मिला। इसके बाद कल शाम शासन ने 10त्न कम कीमत पर बोली लगाने का निर्णय लिया है। आज से इस आधार पर सातवें चरण की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो रही है, जिसमें आए टेंडरों को कल खोला जाएगा। उम्मीद है कि इस कीमत पर ज्यादातर दुकानें नीलाम हो जाएंगी।
38 दुकानें बिकना बाकी फिर भी इंदौर सबसे आगे
प्रदेश के सभी 55 जिलों की बात करें तो इंदौर सबसे बेहतर स्थिति में बना हुआ है। इंदौर की 173 दुकानों को 2102 करोड़ रुपए में नीलाम करने का लक्ष्य मिला था। इनमें से अब तक 1657 करोड़ की 135 दुकानों को 1821 करोड़ में नीलाम किया जा चुका है। वहीं शेष 38 दुकानों की नीलामी बाकी है, जिनकी कीमत 445 करोड़ है। इसके बाद भी इंदौर राजस्व वसूली के मामले में प्रदेश में सबसे आगे है। इंदौर उन जिलों से भी आगे है, जहां 100त्न दुकानें बिक चुकी हैं।
प्रमुख महानगरों में भोपाल सबसे पीछे
इंदौर सहित प्रदेश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो राजधानी भोपाल सबसे पीछे है। यहां अब तक 24.39त्न राजस्व लक्ष्य ही पूरा हो पाया है, जबकि ग्वालियर ने इंदौर से भी ज्यादा 79.47त्न लक्ष्य पूरा किया है, लेकिन राजस्व के आंकड़ों में काफी पीछे है। उज्जैन ने 45त्न और जबलपुर ने 33त्न लक्ष्य ही पूरा किया है।
प्रदेश के बड़े शहरों का हाल
जिला नीलामी लक्ष्य राजस्व
इंदौर 78.84 त्न 2102 1821
भोपाल 24.39त्न 1431 356.6
जबलपुर 33.52त्न 1104 383.6
ग्वालियर 79.47त्न 677 570.4
उज्जैन 45.92त्न 720 332.9
(जानकारी आबकारी विभाग के मुताबिक, आंकड़े करोड़ में)
आज से शुरू होगी सातवें चरण की नीलामी
सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी ने बताया कि राजस्व के मामले में इंदौर प्रदेश में सबसे आगे है। शासन द्वारा तय कीमत से 10 प्रतिशत कम पर बोली लगाने के विकल्प के साथ आज से सातवें चरण की नीलामी शुरू हुई है। इसमें उम्मीद है कि इंदौर की बची हुई ज्यादातर दुकानें नीलाम हो जाएंगी। अब तक इन्दौर द्वारा 1821 करोड़ का रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है। इसके साथ ही इन्दौर ने पिछले साल अर्जित कुल राजस्व रिकार्ड भी तोड़ दिया है।
6 जिलों में नीलामी पूरी
प्रदेश में 6 जिले ऐसे भी हैं, जहां नीलामी पूरी हो चुकी है। इनमें खरगोन, डिंडौरी, मंडला, शहडोल, सीधी और उमरिया शामिल हैं। वहीं दमोह (19.38 त्न), कटनी (20.85त्न), शाजापुर (21.32त्न), आलीराजपुर (22.62त्न) और रतलाम (22.96त्न) जैसे जिलों में नीलामी की रफ्तार सबसे धीमी बनी हुई है।
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