
इंदौर। लवकुश चौराहा (Lav-Kush Crossing) पर प्राधिकरण द्वारा जो डबल डेकर ब्रिज (Double-Decker Bridge) बनवाया जा रहा है, वह भी हालांकि लेटलतीफी का शिकार हुआ। अब 800 टन वजनी बोस्टिंग (800-Ton Bracing ) की लॉन्चिंग की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दो-तीन दिन में ही आधी रात के बाद विशालकाय क्रेन विशेषज्ञों और तमाम सुरक्षा प्रबंधों के बीच ये दो बोस्टिंग लॉन्च की जाएगी। जमीन से 70 फीच ऊंचे इस ब्रिज की एक लेयर पर सडक़ यातायात, दूसरी लेयर पर मेट्रो ट्रेन भी गुजरेगी।
प्राधिकरण के मुताबिक 85 फीसदी इस ब्रिज का काम पूरा हो चुका है और अब 400-400 टन वजन की दो बोस्टिंग लॉन्चिंग की जाना है, जो तैयार होकर भी साइड पर आ चुकी है। सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक बोस्टिंग की लॉन्चिंग ही है, जिसके लिए पर्याप्त सावधानी और सुरक्षा बरती जा रही है। अपनी तरह का अनूठा यह डबल डेकर ब्रिज इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा ब्रिज रहेगा, जिस पर 180 करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राधिकरण द्वारा खर्च की जा रही है। लवकुश चौराहा पर प्राधिकरण पहले से ही फोरलेन का फ्लायओवर भी बना चुका है, जो एमआर-10 से सुपर कॉरिडोर की ओर जाता है। वहीं यह डबल डेकर ब्रिज बाणगंगा से उज्जैन रोड की तरफ निर्मित किया जा रहा है, जिसमें दो लेयर पर ट्रैफिक चलेगा। एक पर अन्य वाहन और दूसरी पर मेट्रो ट्रेन गुजरेगी। सिंहस्थ के मद्देनजर भी इस ब्रिज की उपयोगिता बढ़ेगी, क्योंकि सबसे अधिक यातायात का दबाव लवकुश चौराहा पर ही रहेगा, जिसमें चारों तरफ से यातायात चलेगा। एयरपोर्ट की ओर से आने वाले वाहनों के अलावा बाणगंगा और एमआर-10 के साथ-साथ उज्जैन से भी इंदौर प्रवेश के लिए यह चौराहा महत्वपूर्ण है।
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