
इन्दौर। पानी की एक-एक बूंद, सहेजने और जलस्तर बढ़ाने के लिए गंगा जल संवर्धन जैसी योजनाओ पर सरकार जहां करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं एक महिला अधिकारी ने अपनी सूझबूझ और दूरदर्शिता के चलते किसानों के श्रम सहयोग से मोरोद गांव में 5 वर्ग हेक्टेयर का तालाब तैयार कर शासन के लाखों रुपए की बचत कर डाली है।
गंगा जल संवर्धन के तीसरे चरण के लिए सरकार इस साल भी इन्दौर में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, मगर वन विभाग की महिला अधिकारी ने अपनी सूझबूझ से साबित कर दिया है कि जरा सी दूरदर्शिता और सूझबूझ से लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए बिना भी जल संवर्धन का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है। इंदौर फॉरेस्ट रेंजर संगीता ठाकुर के अनुसार इंदौर के पास मोरोद गांव के पास वन विभाग के जंगल और जमीन है, जहां पर प्राकृतिक पहाड़ी भी मौजूद है, जिसे कुर्बान पहाड़ कहते हैं।
उन्होंने जब पिछले साल 2025 में इन्दौर रेंज जॉइन करने के बाद मोरोद गांव तरफ का विभागीय दौरा किया तो देखा कि कुर्बान पहाड़ के नीचे वन विभाग की लगभग 5 हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक रूप से ऐसी जल संरचना मौजूद है कि बारिश के दौरान पहाड़ों से बहता हुआ पानी यहीं आता है, मगर पाल नही होने के कारण यह सारा पानी बहकर चला जाता है। इसके बाद ग्रामीणों व किसानों से बात कर उन्होंने उन्हें समझाया कि यदि आप लोग श्रमदान सम्बन्धित सहयोग करें तो जो पानी हर साल बहकर चला जाता है, हम इसे बचा सकते हैं।
इससे आपके गांव का न सिर्फ जलस्तर बढ़ेगा, बल्कि यह पानी सालभर आपके पशुधन और खेती के काम आएगा। इसके बाद ग्रामीण व किसानों ने पाल बनाने के लिए श्रम सहयोग किया। कहीं-कहीं प्राकृतिक गड्ढों को एक-दूसरे से जोडक़र उनका मिलान किया गया और देखते ही देखते वन विभाग की जमीन पर 5 वर्ग हेक्टेयर का तालाब तैयार कर डाला। इस दौरान बमुश्किल 3 लाख रुपए ही खर्च हुए है। नतीजतन पिछले साल पहाड़ से बहकर आया पानी अभी तक तालाब में मौजूद है। इससे न सिर्फ गांव का जलस्तर बढ़ गया, बल्कि अब गर्मी के मौसम में भी पानी लबालब भरा हुआ है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved