
नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs) ने मंगलवार को कहा कि बीमा कंपनियां (Insurance Companies) 22 सितंबर से व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी (Individual health and life insurance policies) के लिए कमीशन और ब्रोकरेज जैसे ‘इनपुट’ यानी कच्चे माल के लिए चुकाए गए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा नहीं कर पाएंगी। सीबीआईसी ने 22 सितंबर से नए जीएसटी स्लैब लागू होने पर विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर कराधान के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की सूची जारी की है।
जीएसटी परिषद ने तीन सितंबर को अपनी बैठक में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी पर चुकाए गए प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने का निर्णय लिया। फिलहाल इस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। छूट 22 सितंबर से प्रभावी होगी। इस सवाल के जवाब में कि बीमा कंपनियों की कौन सी ‘इनपुट’ सेवाएं जीएसटी से मुक्त हैं, सीबीआईसी ने कहा कि वर्तमान में, बीमा कंपनियां कमीशन, ब्रोकरेज और पुनर्बीमा जैसे कई इनपुट और इनपुट सेवाओं पर आईटीसी का लाभ उठा रही हैं।
सीबीआईसी ने कहा, ‘इन इनपुट सेवाओं में से, पुनर्बीमा सेवाओं को छूट दी जाएगी। अन्य कच्चे माल के मामले में इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस ले लिया जाएगा। इसका कारण अंतिम उत्पाद सेवाओं को जीएसटी छूट दी जा रही है।’ इसका मतलब यह है कि व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी के मामले में कमीशन और ब्रोकरेज जैसे ‘इनपुट’ पर चुकाए गए कर, बीमा कंपनियों के लिए लागत होंगी, क्योंकि वे ऐसे करों को समायोजित नहीं कर पाएंगी।
कुछ सेवाओं पर 18 प्रतिशत शुल्क का विकल्प नहीं
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने कहा कि ऐसे सेवा प्रदाता जो बिना आईटीसी वाली पांच प्रतिशत श्रेणी में आते हैं, उनके पास इन सेवाओं पर आईटीसी के साथ 18 प्रतिशत शुल्क लेने का विकल्प नहीं है। सीबीआईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि 7,500 रुपये प्रति कमरा प्रतिदिन से कम या उसके बराबर मूल्य वाली आवास इकाइयां प्रदान करने वाले होटल ऐसी इकाइयों पर आईटीसी का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसका कारण ऐसी आपूर्तियों पर आईटीसी के बिना पांच प्रतिशत जीएसटी दर लागू है। इसी प्रकार, सौंदर्य और शारीरिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बिना आईटीसी के पांच प्रतिशत की दर है।
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