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ईरान-इजरायल-अमेरिका सभी ने तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून: फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब

March 06, 2026

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव (Rising tensions in West Asia) के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा संघर्ष में  इजराइल द्वारा ईरान (Iran, Israel) और अमेरिका (United States) तीनों ही देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाओं से बाहर जाकर कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों पर हमला कर ईरान ने एक “रणनीतिक गलती” की है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं।

बातचीत में स्टब ने कहा कि ईरान द्वारा खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने के बाद अब ये देश एकजुट होकर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं। उनके मुताबिक यह कदम ईरान के लिए उल्टा भी पड़ सकता है।

28 फरवरी के बाद भड़का संघर्ष

पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट उस समय और गहरा गया जब United States और Israel ने 28 फरवरी को Iran पर सैन्य हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।

इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए United Arab Emirates, Bahrain, Kuwait, Jordan और Saudi Arabia में मौजूद अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई हमले किए, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया।

हमलों के पीछे बताए जा रहे चार कारण

स्टब ने कहा कि वह खुद को इस मामले का विशेषज्ञ नहीं मानते, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार इस टकराव के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जाते हैं—

परमाणु हथियारों को लेकर आशंकाएं

बैलिस्टिक मिसाइलों का मुद्दा

Hamas, Hezbollah और Houthis जैसे संगठनों के जरिए हमले

क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में यह कहना मुश्किल है कि यह संघर्ष आखिर किस तरह समाप्त होगा।

अंतरराष्ट्रीय कानून से बाहर की कार्रवाई

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसे सैन्य अभियानों के लिए या तो United Nations की मंजूरी ली जाती है या फिर “इच्छुक देशों का गठबंधन” बनाया जाता है। लेकिन इस मामले में कई कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों से बाहर उठाए गए।

उनके अनुसार अब ईरान के खाड़ी देशों पर हमले के बाद ऐसा गठबंधन बनने के संकेत दिख रहे हैं, जिसमें France और United Kingdom जैसे यूरोपीय देश भी सक्रिय हो सकते हैं।



  • वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

    स्टब ने कहा कि लगभग 80 साल पहले बनी नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था इस समय दबाव में है। हालांकि उनका मानना है कि यह व्यवस्था खत्म नहीं हुई है, बल्कि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।

    उन्होंने कहा कि United Nations, World Trade Organization, International Monetary Fund और World Bank जैसी संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए ग्लोबल साउथ के देशों को अधिक अधिकार और प्रतिनिधित्व देना जरूरी है।

    दुनिया की दिशा तय करेंगे भारत जैसे देश

    स्टब के मुताबिक भविष्य की वैश्विक व्यवस्था तय करने में India जैसे देशों की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं ही तय करेंगी कि आने वाले वर्षों में दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी टिप्पणी

    स्टब ने यह भी कहा कि अगर Russia ने Ukraine पर हमला न किया होता, तो Finland शायद कभी NATO में शामिल नहीं होता। उन्होंने रूस की कार्रवाई को “रणनीतिक गलती” बताया, क्योंकि इससे नाटो और मजबूत हुआ है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व पर पूछे गए सवाल पर स्टब ने कहा कि अमेरिका के साथ रिश्तों को व्यावहारिक नजरिये से देखना चाहिए। उनके अनुसार ट्रंप एक “डील करने वाले नेता” हैं, इसलिए मतभेदों के बावजूद अमेरिका के साथ सहयोग बनाए रखना जरूरी है।

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