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अमेरिकी नाकाबंदी को मात देने की तैयारी में ईरान, ‘शैडो फ्लीट’ से तेल टैंकर निकालने का प्लान

July 15, 2026

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सीजफायर समझौते के खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव तेज हो गया है। ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, लेकिन अब ईरान इस नाकाबंदी से बचने के लिए गुप्त समुद्री नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की निगरानी के लिए दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 1,000 से ज्यादा नौसैनिक और कम से कम 19 युद्धपोत तैनात किए हैं। इसके जवाब में ईरान अपने ‘शैडो फ्लीट’ यानी गुप्त जहाजी बेड़े के जरिए तेल निर्यात जारी रखने की कोशिश कर रहा है।

23 जहाज ट्रैकिंग सिस्टम से बचने की कोशिश में
समुद्री निगरानी से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान से जुड़े कम से कम 23 जहाज सक्रिय हैं। ये जहाज अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद या उसमें बदलाव करके ‘डार्क फ्लीट’ या ‘शैडो फ्लीट’ की तरह काम कर रहे हैं। समुद्री खुफिया कंपनी विंडवर्ड के मुताबिक, ये जहाज अमेरिकी निगरानी से बचने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। इनमें दूसरे देशों के झंडों का इस्तेमाल, ट्रांसपोंडर बंद करना और अपनी वास्तविक पहचान छिपाने जैसी तकनीकें शामिल हैं।


  • प्रतिबंधों से बचने के लिए पहले भी इस्तेमाल करता रहा है ईरान
    ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ऐसे गुप्त शिपिंग नेटवर्क का सहारा लेता रहा है। इसी नेटवर्क के जरिए वह कच्चे तेल का निर्यात करता है, जिसमें चीन उसका प्रमुख खरीदार बना हुआ है। ‘टैंकरट्रैकर्स’ के आंकड़ों के अनुसार, तमाम नई पाबंदियों के बावजूद ईरान ने जून महीने में करीब 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया है।

    10 तेल से लदे टैंकर, 13 नए माल का इंतजार कर रहे
    रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े 23 जहाजों में से 10 इस समय कच्चे तेल या अन्य सामान से भरे हुए हैं। वहीं 13 जहाज खाली हैं, जो नए माल की लोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा सात प्रतिबंधित VLCC (Very Large Crude Carrier) टैंकर हिंद महासागर में मौजूद हैं। ये सभी ईरानी तेल से लदे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की तलाश में हैं।

    पहले भी नाकाबंदी के बावजूद जारी रहा तेल निर्यात
    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पहले भी ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए कदम उठा चुका है। उस समय ईरानी तेल निर्यात में कमी जरूर आई थी, लेकिन अमेरिका इसे पूरी तरह बंद नहीं कर पाया था। हालांकि, प्रतिबंधों के कारण ईरान में महंगाई बढ़ी और आर्थिक दबाव काफी ज्यादा हो गया था। अब नजर इस बात पर है कि अमेरिकी निगरानी के बीच ईरान का गुप्त समुद्री नेटवर्क कितना प्रभावी साबित होता है।

    ईरान का दावा- तेल निर्यात सामान्य जारी
    इस बीच ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दावा किया है कि अमेरिका द्वारा 60 दिनों की प्रतिबंध छूट खत्म किए जाने के बावजूद देश का कच्चा तेल निर्यात सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करने के लिए पहले से ही मजबूत व्यवस्था तैयार कर रखी है। पाकनेजाद ने अमेरिका के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने अपने वादों का उल्लंघन किया है और इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा 10 का पालन नहीं किया।

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