
नई दिल्ली. अमेरिकी उपराष्ट्रपति (US Vice President) जेडी वेंस (JD Vance) ईरान (Iran) के साथ होने वाली संवेदनशील वार्ताओं में शामिल होने के लिए स्टैंडबाय पर रखे गए हैं. बैकचैनल बातचीत का लेवल सीधे मुलाकातों तक पहुंचने की स्थिति में वेंस कमान संभालेंगे. मौजूदा वक्त में यह वार्ता राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर के नेतृत्व में चल रही है. ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि क्या आज ही सीजफायर का ऐलान हो जाएगा?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस बातचीत के बदले में ईरान की तरफ से क्या प्रस्ताव या शर्तें रखी जा सकती हैं. अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीयता के साथ आगे बढ़ा रहा है, जिससे सीधे संवाद की स्थिति बनाई जा सके.
बातचीत करने वालों को इस बात की उम्मीद कम है कि ईरान, राष्ट्रपति ट्रंप की उस मांग को मानने के लिए झुकेगा, जिसमें उन्होंने मंगलवार रात की डेडलाइन से पहले होर्मुज़ को फिर से खोलने को कहा है. अगर ऐसा नहीं होता है, तो इससे अमेरिका के लिए जंग को और तेज़ करते हुए ईरान के पुलों और पावर प्लांट को निशाना बनाने का रास्ता खुल जाएगा.
अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने दो बार ईरान के साथ डील के लिए डेडलाइन तय की. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान के नेता उनकी बात नहीं मानेंगे तो वह उस देश पर बमबारी करेंगे और फिर उन्होंने वाकई में सैन्य कार्रवाई की.
पर्दे के पीछे क्या चल रहा है?
Politico ने सोमवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर मीडिएटर्स के ज़रिए चल रहे संपर्क सीधे बातचीत की ओर बढ़ते हैं, तो US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी प्रतिनिधियों के साथ संभावित सीधी बातचीत में हिस्सा लेंगे. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा करते हुए कहा गया, “वेंस तैयार बैठे हैं. अगर बैकचैनल बातचीत ईरानी अधिकारियों के साथ सीधी मुलाक़ात के स्तर तक पहुंचती है, तो वे ईरान के साथ संवेदनशील बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं.”
अख़बार ने बताया कि इस चरण में US के विशेष राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी नेता के दामाद जेरेड कुशनर ईरान के साथ बातचीत में शामिल हैं, लेकिन अगर ये दोनों आगे बढ़ते हैं, तो वेंस को इसमें शामिल किया जा सकता है.” इससे पहले, US के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत चल रही है, जिसमें वेंस और विटकॉफ भी शामिल हैं.
अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया. तेहरान सहित ईरान के प्रमुख शहरों पर हमले किए गए. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान करते हुए इज़रायल में स्थित ठिकानों को निशाना बनाया. बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए.
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