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‘हम जंग बेचने नहीं आए, शांति बनाने आए हैं’, ट्रंप के प्रस्ताव खारिज करने के बाद अराघची का जवाब

September 28, 2026

नई दिल्ली। अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) ने अपने देश का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और न्यूयॉर्क में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (President Masoud Pezeshkian) और वह युद्ध का रास्ता तलाशने नहीं, बल्कि शांति कायम करने आए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान पर सैन्य हमला हुआ तो उसका जवाब देने के लिए तेहरान पूरी तरह तैयार है।

अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें सात दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी। ट्रंप ने प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि ईरान दबाव में होने के कारण तत्काल समझौता चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह आगे बातचीत हो सकती है।

‘युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हमले का जवाब देंगे’

अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति पेजेशकियान और वह न्यूयॉर्क युद्ध बेचने नहीं, बल्कि शांति कायम करने आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी आक्रामक कार्रवाई के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा।

ईरानी विदेश मंत्री ने कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई की स्थिति में ईरान जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने यहां तक कहा कि हालात बेहद गंभीर होकर ‘एपोकैलिप्टिक वॉर’ तक पहुंचने की स्थिति में भी ईरान पीछे नहीं हटेगा।


  • ईरान ने दिया था 7 दिन का रोडमैप

    ईरान ने अमेरिका के सामने एक सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत कुछ अमेरिकी शर्तों को पूरा किए जाने पर ईरान सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।

    अराघची के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। उनका कहना था कि अमेरिका जैसे ही प्रस्ताव को स्वीकार करता है, उसके अगले दिन से सात दिन का टाइमलाइन शुरू हो सकता है। सात दिन पूरे होने के बाद होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है।

    होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने रखी शर्तें

    ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए पहले अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे। इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत और युद्धविराम शामिल हैं। प्रस्ताव में लेबनान को भी युद्धविराम के दायरे में शामिल करने की बात कही गई है।

    अराघची ने कहा कि अमेरिका के प्रस्ताव खारिज करने की औपचारिक जानकारी अभी तक मध्यस्थों की ओर से ईरान को नहीं दी गई थी और तेहरान अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 26 सितंबर को सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव को खारिज करने की पुष्टि कर दी।

    ट्रंप बोले- ईरान दबाव में है

    ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोलने का समझौता इसलिए चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह दबाव में है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालांकि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया और कहा कि इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच और बातचीत हो सकती है।

    इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक संपर्क की संभावना बनी हुई है। हालांकि, सात दिन वाले प्रस्ताव पर दोनों पक्षों की शर्तों में फिलहाल बड़ा अंतर है।

    पेजेशकियान भी बोले- दबाव में बातचीत नहीं

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव और धमकियों की स्थिति में समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

    ईरान की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना जरूरी होगा। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति पर कायम है।

    होर्मुज बना गतिरोध का सबसे अहम मुद्दा

    अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से समुद्री आवाजाही और तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है।

    फिलहाल ईरान सात दिन वाले अपने प्रस्ताव पर कायम है, जबकि ट्रंप इसे खारिज कर चुके हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों की ओर से बातचीत की संभावना के संकेत दिए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि होर्मुज, युद्धविराम और परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच कोई साझा रास्ता निकलता है या नहीं।

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