
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) द्वारा नितिन नवीन (Nitin Naveen) को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष (New National President) घोषित किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा ने पहले अध्यक्ष घोषित कर दिया और बाद में चुनाव की औपचारिकता की बात कही। कांग्रेस का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह आंतरिक लोकतंत्र के दावों पर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस का हमला क्यों?
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अगर यह चुनाव था तो प्रक्रिया कहां हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले नाम तय करना और फिर चुनाव की बात करना किस तरह का लोकतांत्रिक तरीका है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा में संगठनात्मक चुनाव सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं और असली फैसले पहले ही बंद कमरों में हो जाते हैं।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी घसीट लिया। पवन खेड़ा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कोई भूमिका ही नहीं रही, इसलिए उन्हें “छेड़छाड़” का मौका भी नहीं मिला। कांग्रेस पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाती रही है और इस बयान के जरिए उसने अपने हमले को और तेज कर दिया।
‘बॉस-बॉस’ की राजनीति पर कटाक्ष
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी मामलों में नितिन नवीन उनके बॉस हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा में कभी कोई किसी का बॉस बन जाता है और कभी कोई और। उन्होंने इसे ‘बॉस-बॉस’ का खेल बताते हुए कहा कि देश और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कांग्रेस ने हाल ही में गंगा में स्नान को लेकर साधु-संतों से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। पवन खेड़ा ने कहा कि एक तरफ हिंदू धर्म के बड़े संत आहत हैं और दूसरी तरफ भाजपा सत्ता के खेल में व्यस्त है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह राजनीति नहीं बल्कि ‘बिग बॉस’ जैसा शो बन गया है, जहां हर दिन नया ड्रामा दिखाया जाता है।
शहरी नक्सल वाले बयान पर भी कांग्रेस हमलावर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहरी नक्सल चुनौती का जिक्र किए जाने के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने संसद में केंद्र सरकार के पुराने जवाब का हवाला देते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मानते हैं कि जो भी उनके विरोध में बोले, उसे शहरी नक्सल मान लिया जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ किया था कि अर्बन नक्सल शब्द सरकारी शब्दावली का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री बार-बार इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विरोध की आवाजों को बदनाम करने जैसा है।
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया उस भाषण के बाद आई है, जिसमें प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ‘शहरी नक्सलों’ को देश के लिए खतरा बताया। मोदी ने कहा कि ये लोग सरकार या उनके पक्ष में बोलने वालों को भी निशाना बनाते हैं और उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना या आर्थिक असमानता पर सवाल उठाने वालों को भी ‘शहरी नक्सल सोच’ से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या हर असहमति को इसी नजर से देखा जाएगा।
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