
नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार (Karnataka Government)ने बुधवार को अभिनेत्री रान्या राव (Ranya Rao) से जुड़े गोल्ड तस्करी मामले (gold smuggling case)में राज्य पुलिस(State Police) द्वारा कथित तौर पर विशेषाधिकारों के दुरुपयोग की CID जांच की अनुमति देने वाले आदेश को वापस ले लिया. राज्य सरकार द्वारा निर्देश जारी करने के एक दिन बाद यह आदेश आया. सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को आधिकारिक विशेषाधिकारों और प्रोटोकॉल लाभों के दुरुपयोग में पुलिस की कथित संलिप्तता की सीआईडी जांच का आदेश दियाय. राव को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 12.86 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के 14.2 किलोग्राम सोने के साथ पकड़े जाने के एक हफ्ते से अधिक समय बाद यह आदेश आया है.
हालांकि, कर्नाटक सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता के नेतृत्व में रान्या राव के सौतेले पिता और पुलिस महानिदेशक (DGP) के रामचंद्र राव की भूमिका की जांच जारी रहेगी. के रामचंद्र राव मौजूदा वक्त में कर्नाटक राज्य पुलिस आवास एवं अवसंरचना विकास निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं.
कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
इससे पहले बेंगलुरु की एक कोर्ट ने मामले में रान्या राव की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अदालत 14 मार्च को अपना फैसला सुना सकती है. राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने अदालत को बताया कि जिस प्रोटोकॉल अधिकारी ने रान्या राव को एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से बचने में मदद की थी, उसे सीनियर अधिकारियों से निर्देश मिले थे.DRI ने आरोप लगाया कि रान्या राव ने सुरक्षा जांच को दरकिनार करने के लिए सीनियर अधिकारियों के लिए बनाए गए VIP एयरपोर्ट प्रोटोकॉल का फायदा उठाया.
कैसे तलाशी से बचती थीं रान्या?
जांच करने वालों ने दावा किया है कि एक राज्य प्रोटोकॉल अधिकारी इमिग्रेशन में जाकर फास्ट-ट्रैक सुरक्षा मंजूरी के लिए अभिनेत्री का सामान उठाता था. इस तरह, वह उतरने के बाद एयरपोर्ट पर तलाशी से बच जाती थी. डीआरआई ने तर्क दिया कि अगर जमानत दी जाती है, तो अभिनेत्री देश से भाग सकती हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं.
कर्नाटक सरकार ने इस बात की भी अलग से जांच शुरू की है कि क्या रान्या राव के सौतेले पिता के रामचंद्र राव की सोने की तस्करी की घटना में कोई भूमिका थी.
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