
जोधपुर: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं (गर्भवती महिलाओं) की मौत और बिगड़ती तबीयत का मामला अब एक बड़े सियासी तूफान में बदल गया है. कोटा में 5 और बीकानेर में 2 प्रसूताओं की मौत के बाद अब जोधपुर में 8 प्रसूताओं की किडनी फेल होने और 6 महिलाओं को सेप्टीसीमिया (खून में गंभीर इन्फेक्शन) होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर सूबे के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के एक बयान ने आग में घी का काम कर दिया है, जिस पर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने बेहद आक्रामक पलटवार किया है.
जोधपुर और कोटा की घटनाओं पर जब चिकित्सा मंत्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसे लेकर लोगों में रोष व्याप्त है. मंत्री खींवसर ने कहा- आज की युवा पीढ़ी दर्द (लेबर पेन) बर्दाश्त नहीं करना चाहती है. सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) के चलते ऐसे मामले बढ़ रहे हैं.
चिकित्सा मंत्री बोले- हमारे पास अलग-अलग जगहों से बेहद क्रिटिकल कंडीशन में धक्के खाते हुए महिलाएं सरकारी अस्पतालों में पहुंचती हैं. ये सभी रेफरल केसेज हैं जो पहले से ही गंभीर थे. अस्पतालों में प्रसूताओं की मृत्यु दर (Death Rate) मात्र 1% ही है. कोटा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में पानी की मिलावट पाए जाने के बाद विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि प्राइवेट से दवाओं की खरीद को 25% तक कम किया जाए.
मंत्री ने दावा किया कि जोधपुर में फिलहाल कोई भी महिला सीरियस नहीं है. एक महिला पीलिया (जॉन्डिस) की कंडीशन में आई थी. अभी तक की जांच में इन्फेक्शन बड़ा कारण सामने नहीं आया है. मंत्री ने माना कि कोटा के ऑपरेशन थिएटर (OT) में मॉनिटर्स और एसी की देखरेख में कमी थी, जबकि बीकानेर के ओटी में इन्फेक्शन नहीं बल्कि कचरा और गंदगी पाई गई. उन्होंने कहा कि तीनों शहरों के मामले अलग हैं, इन्हें एक साथ जोड़कर (क्लब करके) न देखा जाए.
चिकित्सा मंत्री के इस बयान के बाद पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने सरकार पर लापरवाही छुपाने का सीधा आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला.
खाचरियावास ने कहा- चिकित्सा मंत्री का यह बयान बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन है. ऐसा बयान देने से पहले उन्हें हजार बार सोचना चाहिए था. कोटा और बीकानेर की इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी सरकार ने अभी तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की? इसका साफ मतलब है कि सरकार मौत के असली कारणों और अपनी घोर लापरवाही को छुपाना चाहती है. राजस्थान के मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री ‘मौत के सौदागर’ बन चुके हैं.”
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