
डेस्क: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं. सूत्रों के मुताबिक महुआ के उस आरोप के बाद बागी गुट ने मानहानि का मुकदमा दायर करने का फैसला किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पाला बदलने वाले सांसदों को 40 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की बात कही थी. उन्होंने दावा किया था कि सांसद 40 करोड़ में बिके हैं. जिस पर सांसदों ने नाराजगी जाहिर की है.
सूत्रों ने मुताबिक बागी सांसदों ने एक बैठक की और पार्टी छोड़ने के बदले पैसे की पेशकश किए जाने के दावे के लिए महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने का फैसला किया है. सांसदों ने महुआ के दावे को झूठा और अपमानजनक बताया है. दरअसल महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि TMC छोड़ने वाले 20 सांसदों को 4 करोड़ रुपए एडवांस और बाक़ी 36 महीनों में हर महीने एक-एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे. मोइत्रा ने कहा था कि सांसद चालीस-चालीस करोड़ में बिके हैं. सबको 4-4 करोड़ रुपए एडवांस दिया गया है.
उनका यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस दावे के जवाब में आया था जिसमें राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15 करोड़ रुपए ऑफर किए जा रहे हैं. इसके जवाब में महुआ ने 17 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने कहा था ‘सिर्फ़ 15 करोड़ रुपये? सस्ते में क्यों जा रहे हैं? यकीन मानिए, हमें तो 4 करोड़ रुपये एडवांस में मिले और अगले 36 महीनों तक हर महीने 1 करोड़ रुपये मिलेंगे,. शहद के साथ पैसा भी’.
यह विवाद TMC की लोकसभा इकाई में बड़ी टूट के बाद सामने आया है. जिसमें मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने अलग होकर एक अलग समूह बना लिया है. बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर BJP नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की घोषणा की. दस्तीदार ने कहा कि यह कदम साथी सांसदों से सलाह के बाद उठाया गया और वो जनता के जनादेश को स्वीकार कर NDA के साथ भविष्य देखते हैं.
दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए सभी सांसद त्रिपुरा स्थित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में शामिल हो गए. फिलहाल यह गुट सीधे BJP में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन NDA को समर्थन दे रहा है. इस टूट से TMC की लोकसभा में ताकत घटकर सिर्फ 8 सांसद रह गई है. 1998 में गठन के बाद से यह पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
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