
नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी (Maneka Gandhi) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के हालिया आदेश को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अदालत का आवारा पशुओं (Stray Animals) को पकड़कर शेल्टर होम (Shelter Homes) में रखने का निर्देश ‘अव्यवहारिक’ है। गांधी ने कहा कि भारत को पशुओं के प्रति करुणा पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, न कि नियंत्रण पर।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर कुत्तों के बढ़ते हमलों पर चिंता जताई थी। अदालत ने ऐसे क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने और राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेसवे से मवेशियों को हटाने के निर्देश दिए थे।
मेनका गांधी ने कहा कि अदालत के निर्देश “करो लेकिन कोई कर नहीं सकता” जैसे हैं। उन्होंने कहा कि “कुत्ता हटाओ, बिल्ली हटाओ, बंदर हटाओ और शेल्टर में डालो” यह संभव नहीं है। गांधी ने कहा कि देश में नगर निकायों के बीच तालमेल की कमी है और पशु संरक्षण में व्यावहारिक दृष्टिकोण जरूरी है।
गांधी ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में ‘सिनेकिड’ नामक नई पहल के शुभारंभ के दौरान की। यह पहल फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया और उनकी संस्था ‘पीपल फॉर एनिमल्स द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य फिल्मों में करुणा और मानवीय संवेदनाओं को प्रोत्साहित करना है।
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