
नई दिल्ली। पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई बड़े नेता थे। यह संगठन तालिबान और आईएसआई की मदद से 12 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली पर हमला करने वाला था, लेकिन गृह मंत्रालय की सतर्कता से साजिश नाकाम हो गई। इसके अलावा पीएफआई के निशाने पर कई बड़े नेता और हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी भी थे।
इनका मकसद नेताओं की हत्या कर भारत में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम देना था। इस संगठन की गतिविधियों पर 2017 से नजर थी । गृहमंत्री अमित शाह सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ पीएफआई को लेकर पिछले कई दिनों से बैठक कर रहे थे। पुख्ता तैयारी के बाद देशभर में एक साथ कार्रवाई कर संगठन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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