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तीसरा मोर्चा बनाने में जुटी मायावती! क्या BSP बिगाड़ सकती है NDA-INDIA का समीकरण?

नई दिल्ली: देश में 2024 में लोकसभा चुनाव होना है. चुनाव से पहले दो बड़े गठबंधन एनडीए और ‘INDIA’ के अलावा तीसरे मोर्चे को लेकर भी चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि अभी तक जो दलों ने इन दोनों गठबंधन के साथ नहीं गए है वो इस मोर्चे में शामिल हो सकते है.

BSP सुप्रीमो मायावती न तो बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए में है और न विपक्ष के गठबंधन की हिस्सा है. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि मायावती इस नए फॉर्मूले को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए काम कर रही है. मायावती ने हाल ही में इस साल के अंत में राजस्थान में होने वाले चुनाव में भी अपनी पार्टी को उतारने का ऐलान है. साथ ही माना ये भी जा रहा है कि बीएसपी ओवैसी की पार्टी AIMIM को तीसरे मोर्चे में अपने साथ रख सकती है.

तीसरे मोर्चा के जरिए सियासी खेल पलट
बहुजन समाज पार्टी के लिए ऐसे करना कोई नई बात नहीं है. राजनीतिक परिवेश में ऐसे कई हालात बने है जब मायावती एक अलग गठबंधन के साथ मिलकर पूरी सियासी खेल पलट चुकी हैं. 38 साल पहले 1984 में बनी बीएसपी, जो साल 2007 में उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत लेकर आई थी और अकेले अपने दम पर यूपी में सरकार बनाई. इसके बाद कई मौके आए जब मायावती की पार्टी किंगमेकर भी बनी.

उत्तर प्रदेश में जब राम जन्मभूमि विवाद हुआ, जिसके बाद बीजेपी को राज्य की सत्ता गंवानी पड़ी थी. उस समय ये बीएसपी ही थी जो 1993 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके बीजेपी को उत्तर प्रदेश से उखाड़ कर रख दिया था. उत्तर प्रदेश में हुए 1993 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को 55 सीटों का फायदा हुआ और बीएसपी 67 सीटों पर जीत कर सामने आई थी.


BSP सभी पार्टियों के साथ गठबंधन में रह चुकी है
मायावती की पार्टी आज तक लगभग सभी पार्टियों के साथ गठबंधन में रह चुकी है. उत्तर प्रदेश में साल 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में बीएसपी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के साथ भी गठबंधन में रही थी. हालांकि इस चुनाव में मायावती को सीटों के लिहाज से तो फायदा नहीं हुआ लेकिन वोट फीसदी में बीएसपी का बहुत इजाफा हुआ था. बीएसपी को इस चुनाव में 66 सीटें मिली और करीब 28 प्रतिशत तक वोट शेयर प्राप्त हुआ था. इसके बाद फिर बीएसपी ने गठबंधन किया. बीएसपी ने साल 1997 के चुनाव में बीजेपी के साथ सरकार का गठन किया था.

दलित-मुस्लिम समीकरण पर हो सकती है बात
लोकसभा चुनाव की बात करे तो बीएसपी को साल 2009 के आम चुनाव में कुल 20 सीटें हासिल हुई थी. जबकि उस समय उत्तर प्रदेश से बीजेपी को केवल 10 सीटें ही मिली थी. हालांकि उसके बाद 2014 चुनाव में पार्टी शून्य पर जरूर सिमट गई थी लेकिन पिछली लोकसभा चुनाव में पार्टी 10 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. राज्य में समाजवादी पार्टी को केवल पांच सीट मिला था.

अब ऐसे में चर्चा यह है कि बीएसपी अपने पारंपरिक दलित वोटरों के साथ मुस्लिम मतदाताओं को एक साथ लाकर एक अलग समीकरण तैयार करने में लगी है. जिसके लिए वो एआईएमआईएम पार्टी के प्रमुख ओवैसी के साथ गठबंधन कर सकती है. साथ ही बीएसपी तीसरे मोर्चे के लिए उन सभी दलों को साथ लेकर आ सकती है जो एनडीए और इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं है. ऐसे में कहीं अगर हंग पार्लियामेंट की स्थिति होती है जो ये मोर्चा अहम रोल में दिखाई देगी.

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