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अधिक मास : आज से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास, जानें नियम और महापुण्य देने वाले मंत्र

May 17, 2026

नई दिल्ली. हिंदू कैलेंडर (Hindu Calendar) में धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद खास माना जाने वाला अधिकमास (Adhik Maas) आज (17 मई 2026) से शुरू हो गया है. इसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) या मलमास भी कहते हैं, जो अगले 30 दिनों तक यानी 15 जून 2026 तक चलेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सौर वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच के 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी वैज्ञानिक तालमेल के कारण सभी हिंदू त्योहार सही मौसम में आते हैं. भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित इस पावन महीने में किए गए जप, तप और दान का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है.

अधिकमास में क्या करें?
अधिकमास को आत्मा की शुद्धि और पुण्य कमाने का सबसे उत्तम समय माना जाता है. इस दौरान कुठ कार्य विशेष रूप से फलदायी होते हैं:


  • अधिकमास के विशेष मंत्र
    चूंकि यह महीना भगवान विष्णु का स्वरूप है, इसलिए इस दौरान विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. रोजाना तुलसी की माला से कम से कम 108 बार इन मंत्रों का जाप करें:

    मूल महामंत्र:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
    (यह भगवान विष्णु का सबसे प्रभावशाली मंत्र है, जो मन को शांति और मोक्ष प्रदान करता है.)

    पुरुषोत्तम मास विशेष मंत्र:

    “गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपीवल्लभम्. विष्णुं जिष्णुं जगन्नाथं राधाकृष्णं नमोऽस्तुते॥”
    इस मंत्र के जाप से भगवान श्रीहरि और श्री कृष्ण दोनों की असीम कृपा प्राप्त होती है.

    मनोकामना पूर्ति और संकट नाश के लिए:

    “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे”
    (महामंत्र का कीर्तन या जाप इस महीने में मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाता है.)

    महादान का महत्व: इस महीने में किया गया दान कभी खाली नहीं जाता. अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन या दीपदान (दीपक जलाना) अवश्य करें.

    धार्मिक ग्रंथों का पठन: इस समय को भौतिकता से हटाकर आध्यात्म में लगाने के लिए भगवद्गीता, रामायण या श्रीमद्भागवत पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों का अध्ययन करें और उनकी सीख को जीवन में उतारें.

    सात्विक जीवन और व्रत: जो लोग इस पूरे महीने नियम का पालन करना चाहते हैं, वे एक समय सात्विक भोजन (बिना प्याज, लहसुन और मांस-मदिरा के) करें. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और ध्यान करने से मन शांत होता है.

    अधिकमास में क्या न करें? (वर्जित कार्य)
    अधिकमास के दौरान भौतिक सुखों और इच्छाओं से जुड़े मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है:

    शुभ कार्यों पर रोक: इस पूरे महीने में शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

    नई शुरुआत से बचें: नया बिजनेस शुरू करना, नया घर बनवाना या किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत करना इस दौरान टाल देना चाहिए.

    बड़ी खरीदारी न करें: इस महीने नई गाड़ी, नया मकान या बहुत महंगे सोने-चांदी के गहने खरीदने से बचना चाहिए.

    क्यों टालते हैं सांसारिक और मांगलिक काम?
    माना जाता है कि यह महीना संसार की इच्छाओं (भौतिक सुखों) को छोड़कर केवल ईश्वर की भक्ति में लीन होने का समय है. अधिकमास हमें सिखाता है कि थोड़े समय के लिए बाहरी चकाचौंध से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा और अध्यात्म पर ध्यान दें. इसलिए सांसारिक सुखों से जुड़े कार्यों को रोककर ध्यान केवल आध्यात्मिक उन्नति पर लगाया जाता है.

    पौराणिक कथा: कैसे मलमास बना पुरुषोत्तम मास
    पद्म पुराण के अनुसार, शुरुआत में इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी (देवता) नहीं था. स्वामी विहीन होने के कारण इसे मलमास कहा गया और लोग इसे अपवित्र मानकर इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करते थे. हर तरफ उपेक्षा और तिरस्कार झेलने के कारण यह महीना बहुत दुखी रहने लगा.

    अपनी इस पीड़ा को लेकर मलमास वैकुंठ धाम में भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा. श्रीहरि ने उसकी व्यथा सुनी, उसे सांत्वना दी और सहर्ष स्वीकार कर लिया, भगवान विष्णु ने न केवल उसे अपनी शरण दी, बल्कि उसे अपना सबसे श्रेष्ठ और प्रिय नाम ‘पुरुषोत्तम’ भी उपहार में दे दिया.

    भगवान ने वरदान दिया कि जो भी भक्त इस महीने में निस्वार्थ भाव से मेरी भक्ति, मंत्र जाप और दान करेगा, उसे मेरा विशेष आशीर्वाद मिलेगा और उसका पुण्य कभी खत्म नहीं होगा. इस तरह, जो महीना कभी उपेक्षित था, वह भगवान श्रीहरि की कृपा से सबसे पवित्र और फलदायी पुरुषोत्तम मास बन गया.

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