
उज्जैन। जिला नापतौल विभाग का जर्जर भवन किसी बड़े हादसे को खुला आमंत्रण दे रहा हैं। हालात यह है कि कार्यालय को न तो कोई नया भवन मुहैया हो पा रहा है और किराए का भवन होने के कारण ना ही मरम्मत हो पा रही है। बहरहाल भवन की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि काम करने वाले कर्मचारी डरे व सहमे रहते हैं। बावजूद जिम्मेदार इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। हालत यह हैकि यहाँ पर दुर्गंध भी आती है और रिकार्ड भी व्यवस्थित नहीं हैं। ऐसे में नया भवन कब बनेगा यह किसी को नहीं पता।
उल्लेखनीय है कि जिले की सरकारी और निजी संस्थाओं, पेट्रोल पंपों, प्रतिष्ठानों, दुकानों के तराजू बाँट और तौल पर निगरानी रखने वाला नापतौल विभाग आज भी किराए के जर्जर भवन में लग रहा है। ऐसी परिस्थितियों में यह अंदाजा लगाने को काफी है कि कार्यालय के कर्मचारी किस प्रकार अपने कार्यों को अंजाम देते होंगे। विभागीय अधिकारियों की ओर से इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों को कई बार अवगत भी कराया गया है। बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नापतौल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग को नए भवन निर्माण के लिए शासन से 70 लाख रुपए का बजट तो स्वीकृत हो चुका है, मगर जमीन नहीं मिलने के कारण भवन का निर्माण अटका हुआ है। फिलहाल नापतौल और जिला प्रशासन के अधिकारियों की ओर से जमीन की तलाश अभी भी जारी है। नए भवन की आवश्यकता है और स्टाफ की कमी है। जिले में नापतौल विभाग की कार्रवाई आंशिक है।
एक नजर जमीन आवंटन पर
इनका कहना है
जमीन उपलब्ध कराने को लेकर जिला प्रशासन से निवेदन किया गया है। जमीन उपलब्ध हो जाने के बाद विभाग की ओर से अपना कार्यालय बनाए जाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
संजय पाटनकर, प्रभारी अधीक्षक नापतौल विभाग

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