
ह्यूस्टन. चांद (Moon) की ओर बढ़ रहा आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन अब इतिहास (History) रचने के करीब पहुंच गया है। यह मिशन 53 साल बाद इंसानों को फिर से चांद के पास ले जा रहा है और इससे उम्मीदें काफी बड़ी हैं। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो सोमवार तक चांद के पास पहुंच जाएंगे। वे चांद के उस हिस्से की तस्वीरें लेंगे, जिसे पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। यह मिशन नासा (Mission NASA) के पुराने अपोलो प्रोग्राम के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर ने बताया कि जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे हैं, पृथ्वी छोटी दिख रही है और चांद बड़ा होता जा रहा है। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान में आई एक परेशानी
हालांकि मिशन के दौरान एक छोटी परेशानी भी सामने आई है। अंतरिक्ष यान ओरियन का टॉयलेट ठीक से काम नहीं कर रहा है। लॉन्च के बाद से इसमें बार-बार दिक्कत आ रही है। इंजीनियरों को शक है कि पाइप में बर्फ जमने से समस्या हो रही है। फिलहाल अंतरिक्ष यात्रियों को बैकअप तरीके इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं। नासा के अधिकारियों का कहना है कि अंतरिक्ष में टॉयलेट सिस्टम संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन टीम इस स्थिति को अच्छे से संभाल रही है।
Lock in, we’re Moonbound.
Artemis II astronauts are more than halfway to their destination, and preparations for lunar flyby are underway. During their trip around the far side of the Moon, they will capture imagery to share with scientists (and you, too!). pic.twitter.com/T2z4W2XLCt
— NASA (@NASA) April 4, 2026
अपोलो 13 मिशन के रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी
यह मिशन एक नया रिकॉर्ड भी बनाने जा रहा है। आर्टेमिस II करीब 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा, जो अब तक इंसानों द्वारा तय की गई सबसे ज्यादा दूरी होगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था। इस मिशन की एक खास बात यह भी है कि इसमें कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं, जो चांद की ओर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। वहीं क्रिस्टीना कोच पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत (ब्लैक) अंतरिक्ष यात्री हैं, जो इस मिशन का हिस्सा हैं।
प्रशांत महासागर में लैंड करने आर्टेमिस II मिशन
करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा। नासा का यह मिशन भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास इंसानों की लैंडिंग कराई जाए।
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