img-fluid

MP: पिता-पुत्र की उम्रकैद की सजा को HC ने किया रद्द, जानें क्या है मामला?

August 03, 2025

मंडला। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की एक डिवीजन बेंच ने मंडला जिले (Mandla District) की सत्र न्यायालय (Sessions Court) द्वारा हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए पिता-पुत्र (Father and son) की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और अपराध जांच की विश्वसनीयता पर तीखी टिप्पणी करते हुए DGP को जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और राज्यभर में जांच सुधार के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है।

मंडला जिले में नवंबर 2023 में नैन सिंह धुर्वे और उनके बेटे को राजेंद्र नामक युवक की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। राजेंद्र और आरोपियों की बेटी/बहन के बीच प्रेम संबंध की बात सामने आई थी, जिसे लेकर हत्या की आशंका जताई गई थी।


  • हाईकोर्ट को क्यों लगी बात संदिग्ध?
    न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति ए.के. सिंह की पीठ ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कॉल डिटेल्स में भारी विरोधाभास पाया गया। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने कहा कि राजेंद्र की मृत्यु 19 सितंबर 2021 के 3–4 दिन बाद हुई। लेकिन कॉल रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि वह 25 सितंबर तक आरोपी की बेटी/बहन से मोबाइल पर बातचीत करता रहा। अदालत ने कटाक्ष करते हुए कहा, “विज्ञान अभी इतना विकसित नहीं हुआ है कि कोई मृत व्यक्ति मोबाइल से कॉल कर सके। यह जांच की असलियत उजागर करता है। झूठे गवाह और पुलिस की कपटपूर्ण कार्यप्रणाली को उजागर करता है।”

    आपको बता दें कि इस केस में गवाह चेत सिंह को पुलिस ने पांच महीने बाद केरल से लाकर गवाह बनाया था। उसने दावा किया कि वह घटना की रात आरोपी के घर पर था क्योंकि उसकी बाइक खराब हो गई थी। उसने कथित रूप से देखा कि आरोपी किसी को पीट रहे थे, जिसे पुलिस ने राजेंद्र मान लिया। अदालत ने पाया कि राजेंद्र के परिवार ने कभी पुलिस को प्रेम संबंध की जानकारी नहीं दी। लड़की से पूछताछ तक नहीं की गई, न ही यह पता किया गया कि वह किसी रिश्ते में थी या नहीं।

    अदालत ने DGP मध्यप्रदेश को आदेश दिया है कि जांच अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू करें। राज्यभर में ठोस और निष्पक्ष जांच के लिए दिशा-निर्देश जारी करें। झूठे गवाहों को लाने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई हो। वहीं,सरकारी अधिवक्ता अजय टमराकर को आदेश दिया कि संबंधित पुलिसकर्मियों की सूची व आदेश की प्रमाणित प्रति DGP को सौंपें। 30 दिनों में रिपोर्ट अदालत में पेश करने के लिए कहा है।

    Share:

  • बिहार : उल्टा पड़ा तेजस्वी यादव का दांव? चुनाव आयोग ने शुरू की दूसरे वोटर कार्ड की जांच...

    Sun Aug 3 , 2025
    नई दिल्ली. बिहार (Bihar) में चुनावी साल है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) चर्चा में हैं. तेजस्वी ने दावा किया है कि बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है. उन्होंने जो EPIC नंबर (RAB2916120) शेयर किया, वो रिकॉर्डस में डेटा ‘नो फाउंड’ […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved