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MP: कब तक डर में जिएंगे आदिवासी परिवार? THDC के खिलाफ महिलाओं का हल्लाबोल, गाड़ियों को रोका

October 12, 2026

सिंगरौली। सिंगरौली (Singrauli) जिले में टीएचडीसी (THDC) कंपनी के कोयला खनन कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। ग्रामीणों ने हैवी ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें आने, प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी होने और कथित तौर पर धमकियां दिए जाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के चलते आदिवासी परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं।

महिलाओं ने संभाला मोर्चा, सैकड़ों गाड़ियों की आवाजाही रोकी
ग्रामीणों के विरोध के बीच आज महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए टीएचडीसी कंपनी की सैकड़ों गाड़ियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से कथित तौर पर हैवी ब्लास्टिंग, प्रदूषण और धमकियों जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं। आरोप है कि कंपनी के खनन कार्यों से उनका जनजीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।


  • पुरुषों के विरोध पर मुकदमों की धमकी देने का आरोप
    ग्रामीणों का आरोप है कि जब पुरुष अपनी समस्याओं को लेकर विरोध करते हैं, तो उनके खिलाफ मामले दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कंपनी से जुड़े कुछ लोगों पर डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज दबाने के बजाय समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

    महिलाओं का सवाल—कब तक भय के माहौल में रहेंगे आदिवासी परिवार?
    प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सवाल उठाया कि यदि उनके मकानों में दरारें आ रही हैं, प्रदूषण से स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और उन्हें बार-बार जगह छोड़ने की बात कही जा रही है, तो उनकी सुरक्षा और अधिकारों की जिम्मेदारी कौन लेगा? महिलाओं की मांग है कि हैवी ब्लास्टिंग से मकानों को हुए कथित नुकसान, प्रदूषण के प्रभाव और धमकियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान किया जाए और उन्हें सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
    इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका अहम मानी जा रही है। ग्रामीणों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। साथ ही, मामले में टीएचडीसी कंपनी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि सभी तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जा सके। फिलहाल, महिलाओं के विरोध के बाद क्षेत्र में बने तनावपूर्ण माहौल और ग्रामीणों की मांगों पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हैं।

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