
जबलपुर। भारतीय आध्यात्म मनीषा के सैद्धांतिक आधार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के वैश्विक भाव को साकार करने के लिए ‘समरसता’ नामक जिस मानवीय मूल्य की मूलभूत आवश्यकता है, उसे साकार करने की दिशा में सब सबको जाने – सब सबको माने के सूत्र के साथ समरस भारत से समर्थ भारत के ध्येय को लेकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहे ‘समरसता सेवा संगठन’ ने वर्ष 2026 – 27 की कार्ययोजना में कई नवीन बिंदुओं को शामिल किया है।
महादेव पूजन भी गुरु वंदन भी
इस वर्ष समरसता नामक मूल्य के प्रणेता भगवान शिव का विराट पूजन-अर्चन होगा तो वहीं जीव को ईश्वर से मिलाने वाले गुरुजनों का सामूहिक चरणवंदन भी होगा। पवित्र सावन माह के तीसरे सोमवार को विराट ‘समरसता शिवलिंग निर्माण एवं श्री महारुद्राभिषेक महामहोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। सर्वजाति समाज के लोग एक साथ आशुतोष भगवान शिव की पूूजा-अर्चना कर इस महाअनुष्ठान में सहभागिता करेंगे।
भव्य होंगे पारंपरिक आयोजन
समरसता सेवा संगठन की पहचान बन चुके पारंपरिक आयोजन और भव्यता तथा दिव्यता के साथ मनाए जाएंगे। बताया गया कि शिवरुद्रामहाभिषेक के दिन ही ‘समरसता कजलियां महोत्सव ‘ के पात्र वितरित होंगे। इन पात्रों में सर्वजाति समाज के लोग कजलियां बोएंगे और फिर नए उत्साह के साथ कजलियां मिलन समारोह में शामिल होंगे। इस आयोजन के पूर्व ‘समरसता भृगु वाटिका’ में प्रकृति पूजन-आराधन करते हुए ‘वृहद समरसता पौधारोपण’ की संयोजना की जाएगी। बताया गया कि मार्च में रंगपंचमी के दौरान होने वाले चर्चित ‘समरसता होली मिलन’ को नया स्वरूप देने की कार्ययोजना बनाई गई है।
शक्ति आराधना से समरसता
इस वर्ष महिला शक्ति को समर्पित ‘समरसता गरबा महा महोत्सव’ का जहां आयोजन किया जाएगा तो वहीं युवा शक्ति में समरसता का भाव जागृत करने ‘समरसता क्रिकेट प्रीमियम लीग’ का भी आयोजन करने का निर्णय लिया गया है।
जयंती के साथ दिवसों का आयोजन
इस वर्ष जयंतियां मनाने के साथ ही राष्ट्रीय दिवसों को आधार बना कर मानव सेवा की संकल्पना को साकार करने का प्रयास किया जाएगा। मधुमेह दिवस-नशामुक्ति दिवस पर जहां आम जनों के लिए जन जागरण कार्यक्रम होंगे तो वहीं जांच शिविर का आयोजन कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने का कार्य भी समरसता सेवा संगठन करेगा। जन जातीय गौरव दिवस, परिवार दिवस पर गो रक्षण-संरक्षण, गोसेवा, कृषि विकास की दिशा में आयोजन होंगे। आयुर्वेद दिवस पर भारतीय चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर का आयोजन होगा।
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