img-fluid

तमिलनाडु में गायों की कुर्बानी पर रोक नहीं… SC ने पलटा HC का फैसला

July 13, 2026

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई ) को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसमें राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि बकरीद या किसी अन्य दिन राज्य में किसी भी गाय या बछड़े की हत्या न हो.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका ( SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है.

दरअसल हाईकोर्ट ने मई 2026 में सरकार को राज्य में बकरीद या किसी भी दिन गाय और बछड़ों की हत्या/कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि गाय की बलि इस्लाम में कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का अंतिम हिस्सा, जिसमें पूरे राज्य में गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण रोक लगाई गई थी, उसमें सुधार की आवश्यकता दिखाई देती है. इसी आधार पर कोर्ट ने फिलहाल उस हिस्से के अमल पर रोक लगा दी.

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा. सरकार ने दलील दी कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश राज्य के तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के विपरीत है. इस कानून के तहत 10 साल से ज्यादा उम्र की ऐसी गायों, जो काम करने या प्रजनन के योग्य नहीं हैं, उनका सक्षम अधिकारी के प्रमाणपत्र के आधार पर वध किया जा सकता है.


  • सरकार ने यह भी कहा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, स्लॉटर हाउस नियम, 2001, तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998 और संबंधित नियम पशुओं के वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन इनमें कहीं भी पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है. ऐसे में हाईकोर्ट ने वैधानिक प्रावधानों के विपरीत जाकर आदेश दिया है.

    मद्रास हाईकोर्ट की बेंच ने 27 मई को बकरीद से ठीक पहले यह आदेश पारित किया था. यह जनहित याचिका हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रसांत ने दायर की थी. याचिका में केवल यह मांग की गई थी कि बकरीद के दौरान गोवंश का वध केवल अधिकृत स्थानों पर ही हो और सार्वजनिक स्थानों पर न किया जाए.

    हालांकि ,सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पूरे तमिलनाडु में किसी भी दिन गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक सरकारी आदेश का भी उल्लेख किया था, जिसमें कहा गया था कि गोहत्या पर रोक से दूध के उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि बकरीद पर गोहत्या इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है.

    वहीं तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि हाईकोर्ट का फैसला अपने आप में विरोधाभासी है. एक तरफ को्र्ट ने माना कि पशुओं का वध केवल अधिकृत बूचड़खानों में होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर किसी भी स्थान पर किसी भी दिन गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण रोक लगा दी.

    सरकार का यह भी कहना है कि हाईकोर्ट ने उस राहत से आगे बढ़कर आदेश दिया, जिसकी याचिकाकर्ता ने मांग ही नहीं की थी. पुलिस ने पहले ही कोर्ट को बताया था कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं और धार्मिक बलि केवल बंद और अधिकृत स्थानों पर ही होगी.

    अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामले की आगे सुनवाई होगी. अंतिम फैसला आने तक मद्रास हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया राज्यव्यापी पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी नहीं रहेगा.

    Share:

  • इंदौर सहित 9 स्टेशनों के पूछताछ केंद्र अब निजी एजेंसी संभालेगी

    Mon Jul 13 , 2026
    इन्दौर। पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की पूछताछ व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 20 जुलाई से इंदौर सहित रतलाम मंडल के नौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों के 10 पूछताछ केंद्रों का संचालन निजी एजेंसी करेगी। इसके साथ ही इन केंद्रों पर तैनात 37 रेल कर्मचारी अपनी मूल जिम्मेदारियों में लौट जाएंगे। रतलाम मंडल […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved