
अग्निबाण भंडाफोड़… मुख्य सचिव ने 20 माह पूर्व रुकवाई थी बड़े लेन-देन के साथ भोपाल से हो रही अनुमतियों पर इंदौरी जमीनी जादूगर ले आए प्रशासन के कॉलोनी सेल से विकास अनुज्ञा
इंदौर, राजेश ज्वेल
5 साल बाद भी इंदौर (Indore) के मास्टर प्लान (master plan) को लेकर कोई हलचल नहीं है। 31 दिसम्बर 2021 तक के लिए बने प्लान (plan) को अब 2047 के आधार पर तैयार किया जाना है, जिसमें 79 गांवों को निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया और 1 जनवरी 2022 से इन गांवों की 95 हजार एकड़ जमीनों का लैंड यूज फ्रीज भी कर दिया है, जिसमें से हालांकि नगर तथा ग्राम निवेश 30 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर अभिन्यास मंजूर कर चुका है, तो दूसरी तरफ धारा 16 के तहत मंजूरी भी बड़े आर्थिक लेन-देन के साथ दी गई और लगभग 1 हजार एकड़ से अधिक जमीनों पर शासन द्वारा बनाई कमेटी ने अनुमतियां दे डाली। इसका हल्ला मचने पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने 20 माह पूर्व धारा 16 पर सख्ती से रोक लगा दी। मगर इंदौरी जमीनी जादूगरों ने प्रशासन के कॉलोनी सेल से अपने चार प्रोजेक्टों के लिए विकास अनुज्ञाएं प्राप्त कर लीं। धारा 16 में हुआ यह बड़ा खेला मुरादपुरा की 44 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जहां पर गुरुकृपा के नाम से चार फेज में आ रही कॉलोनियों को मंजूरी दी गई है।
अग्निबाण ने धारा 16 के तहत हो रही मंजूरियों को लेकर भी दो साल पहले कई खुलासे किए थे। 3 से 4 लाख रुपए एकड़ से शुरू हुई ये मंजूरी 15-16 लाख रुपए एकड़ तक पहुंच गई। इसको लेकर इंदौर-भोपाल में भी जमकर हल्ला मचा और सूत्रों का कहना है कि 150 से लेकर 200 करोड़ रुपए तक की ऊपरी कमाई धारा 16 के एवज में अनुमतियां देने के एवज में कर ली गई। धारा 16 की अंतिम बैठक 12 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई। उसमें भी 700 एकड़ से अधिक जमीनों पर अनुमतियां दी गई और मचे हल्ले के चलते मुख्य सचिव अनुराग जैन ने धारा 16 का खेला पूरी तरह से बंद करवा दिया और नगरीय प्रशासन और आवास विभाग तथा नगर तथा ग्राम निवेश को स्पष्ट निर्देश दिए कि मास्टर प्लान का प्रारुप जल्द प्रकाशित किया जाए। हालांकि मेट्रो पॉलिटन रीजन के चलते मास्टर प्लान का काम अटका रहा और 20 माह से धारा 16 में कोई भी अनुमति नहीं दी गई। नतीजतन जमीनी जादूगरों ने दूसरा तरीका अपनाया और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की, जिसमें एसआर रियलिटीज भी शामिल रहा और उसकी याचिका पर पिछले साल 9 दिसम्बर 2025 को सिंगल बैंच ने आदेश दिए कि एसआर रियलिटी की कॉलोनियों गुरुकृपा फेज-2, फेज-3, फेज-4 और फेज-5 को कानून के मुताबिक 30 दिनों में अनुमति दी जाए। इस आदेश पर प्रशासन ने पहले तो कुछ माह तक अनुमति रोके रखी और ना तो डबल बैंच में इसकी अपील की और ना ही शासन को इस मामले से अवगत कराकर मार्गदर्शन मांगा गया। हाईकोर्ट के पूर्व में कई फैसले इस तरह के हो चुके हैं, जिसमें तय समय सीमा में नियमों के तहत अनुमति देने के आदेश हुए और ऐसे कई मामलों में प्रशासन ने अनुमतियां जारी नहीं की और हाईकोर्ट की अवमानना तक का सामना भी किया और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाइयां भी लड़ीं। मगर इस मामले में कलेक्टर कार्यालय के कॉलोनी सेल ने ऐसी कोई पहल नहीं की और मुख्य सचिव द्वारा लगाई गई रोक को धता बताकर एसआर रियलिटीज से जुड़े गुरुकृपा नाम से कॉलोनी के चारों प्रोजेक्टों को विकास अनुज्ञाएं जारी कर डाली, जिसकी पुष्टि कॉलोनी सेल की प्रभारी एसडीएम रोशनी पाटीदार ने करते हुए कहा कि उक्त विकास अनुज्ञाएं हाईकोर्ट आदेश के चलते दी गई, जबकि विधि के तमाम जानकारों का कहना है कि पूर्व में भी इस तरह के कई आदेश आते रहे हैं, जिसमें हाईकोर्ट यह कहता है कि नियमों के तहत अनुमति दी जाए। लिहाजा इस मामले में भी कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को शासन से मार्गदर्शन लेने के साथ-साथ जरूरत पडऩे पर डबल बैंच में अपील भी की जाना थी और हाईकोर्ट निर्देशों के तहत नियमों का परीक्षण कर एक स्पीकिंग ऑर्डर पारित करते हुए विकास अनुज्ञाएं ना जारी करने का फैसला लिया जाना था।
अनेकों प्रकरण में अवमानना का सामना करने के साथ-साथ शासन-प्रशासन ने दृढ़ता दिखाते हुए इस तरह की मंजूरियां नहीं दी है। यहां तक कि पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने भी धारा 16 के तहत ऐसी अनुमतियां नहीं दी और शासन को दो बार पत्र भी लिखे। धारा 16 के तहत उक्त विकास अनुज्ञाएं सांवेर तहसील के मुरादपुरा में खसरा नम्बर 350/10, 342/1 से लेकर 350/6, 352/1 सहित अन्य खसरा नम्बरों की कुल 17.2780 हेक्टेयर यानी लगभग 44 एकड़ पर दी गई है। अब इसी आधार पर अन्य कॉलोनाइजर भी अदालती आदेश लाकर अनुमतियां हासिल करते रहेंगे। अभी चूंकि इंदौर का मास्टर प्लान अगले दो वर्षों तक तो नहीं आना है। ऐसे में अधिकांश जमीनों पर अभिन्यास मंजूर हो जाएंगे, तब मास्टर प्लान का औचित्य ही नहीं बचेगा।
हाईकोर्ट ने कहा- कानून के मुताबिक दी जाए अनुमति
हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में 9 दिसम्बर 2025 को एसआर रियलिटीज विरुद्ध शासन व अन्य की रीट पीटिशन पर जो 7 पेज का फैसला आया उसमें स्पष्ट लिखा है कि गुरुकृपाके चारों फेज की अनुमति 30 दिनों में कानून के अनुरूप दी जाए। इसका मतलब साफ है कि हाईकोर्ट की मंशा थी कि अगर अनुमति कानून सम्मत है तो दी जाए। मगर प्रशासन ने पहले तो महीनों तक इस अनुमति को रोके रखा और पिछले दिनों चुपचाप चारों कॉलोनियों के प्रोजेक्टों को मंजूरी दे डाली, जबकि प्रशासन ऐसे कई मामलों में शासन-प्रशासन अपील करने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ता रहा है और इस मामले में भी हाईकोर्ट आदेश के मद्देनजर कॉलोनी सेल द्वारा विधिवत स्पीकिंगऑर्डर पारित किया जाता, जिसमें नियमों का हवाला देते हुए मंजूरी से इनकार किया जा सकता था। इसके बाद पीटिशनर चाहता तो फिर हाईकोर्ट जाता। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में कंटेम्प यानी अवमानना की याचिका भी दायर होने की जानकारी सामने नहीं आई है, जबकि पूर्व में ऐसे ही मामलों में शासन-प्रशासन ने अवमानना याचिकाओं की भी परवाह ना करते हुए कोर्ट को वस्तुस्थिति से अवगत कराया, जबकि इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया।
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