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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: जांच के घेरे में प्रबंधन, दस्तावेजों में नाम न आने से चंपत राय पर सीधे आरोप नहीं

July 11, 2026

लखनऊ। अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर चढ़ावा गणना और कथित चोरी प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ट्रस्ट के कामकाज और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अब तक सामने आई एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है, जबकि ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनमें बैंकिंग प्रक्रियाओं, दान राशि की गणना व्यवस्था और संबंधित समझौतों पर डॉ. अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इसके विपरीत, जांच में अब तक ऐसा कोई दस्तावेज सामने नहीं आया है जिस पर चंपत राय के हस्ताक्षर हों या जिनसे उनकी प्रत्यक्ष प्रशासनिक भूमिका स्थापित होती हो।

दस्तावेजी साक्ष्यों ने तय की जांच की दिशा

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने अपने निष्कर्ष मुख्य रूप से लिखित रिकॉर्ड, बैंक समझौतों, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए हैं। बैंक के साथ हुए एमओयू तथा दान गणना व्यवस्था से जुड़े कई कागजातों में अनिल मिश्रा की भूमिका दर्ज मिली, जबकि चंपत राय का नाम या हस्ताक्षर नहीं मिले।

इसी वजह से प्रारंभिक रिपोर्ट में अनिल मिश्रा पर जवाबदेही तय की गई, जबकि चंपत राय के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप दर्ज नहीं किए गए।


  • विस्तृत रिपोर्ट में बदल सकती है तस्वीर

    हालांकि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में शासन को सौंपी जानी है। सूत्रों का दावा है कि अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।

    ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि प्रबंधन की सर्वोच्च जिम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारियों की भूमिका पर भी टिप्पणी की जा सकती है। यदि निगरानी में चूक या प्रशासनिक लापरवाही के तथ्य सामने आते हैं तो जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

    भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

    जांच के दौरान मंदिर परिसर में नियुक्त कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया और उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियां भी सवालों के घेरे में आई हैं। आरोप है कि कुछ संवेदनशील कार्यों में ऐसे कर्मियों को लगाया गया जिनकी निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी।

    सूत्रों के मुताबिक, दान पात्रों की चाबियों और गणना प्रक्रिया तक कुछ कर्मचारियों की पहुंच को लेकर भी जांच एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। इसी आधार पर सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली की समीक्षा की जा रही है।

    कर्मचारियों में बढ़ी चिंता, कई ने छोड़ा काम

    चढ़ावा गणना प्रकरण में हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बाद मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारियों में चिंता का माहौल बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गणना कार्य से जुड़े कई कर्मचारी पिछले दिनों से काम पर नहीं पहुंच रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि पहले जिन कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है, उनमें से कुछ को आगे की कार्रवाई का डर सता रहा है। फिलहाल दान राशि की गणना का कार्य सीमित संख्या में उपलब्ध कर्मचारियों की मदद से कराया जा रहा है।

    गौरतलब है कि इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं एसआईटी अब विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसके बाद मामले में और बड़े खुलासे या प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की संभावना जताई जा रही है।

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