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उत्तर कोरिया ने बढ़ाई सैन्य ताकत, नए युद्धपोत के साथ नौसेना को परमाणु क्षमता देने की तैयारी

June 24, 2026

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया (North Korea) ने अपनी नौसैनिक शक्ति को मजबूत (Strong naval power) करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 5,000 टन क्षमता वाले नए विध्वंसक युद्धपोत को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल कर लिया है। इस अवसर पर देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने घोषणा की कि देश की नौसेना को परमाणु हथियारों (Nuclear weapons) से लैस करने की योजना तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। इस कदम ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी Korean Central News Agency (केसीएनए) के अनुसार, मंगलवार को पश्चिमी बंदरगाह शहर Nampo में आयोजित एक समारोह के दौरान ‘चोए ह्योन’ नामक युद्धपोत को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। इसे पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

किम जोंग उन ने कहा कि यह युद्धपोत उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमता और आधुनिक नौसैनिक रणनीति का प्रतीक है। उनके मुताबिक, अब देश की नौसेना केवल तटीय रक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रणनीतिक अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


  • अप्रैल 2025 में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए इस युद्धपोत का पिछले कई महीनों से परीक्षण चल रहा था। उत्तर कोरियाई दावों के अनुसार, यह पोत आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों, पोत-रोधी हथियारों तथा परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से लैस है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    दक्षिण कोरियाई अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना में रूस की तकनीकी सहायता मिली हो सकती है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का एक और संकेत माना जाएगा।

    हाल के महीनों में उत्तर कोरिया ने इस युद्धपोत से कई परीक्षण किए हैं, जिनमें कथित रूप से परमाणु क्षमता वाली क्रूज मिसाइलों का प्रक्षेपण भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग अब अपनी सैन्य रणनीति में नौसेना को अधिक महत्व दे रहा है, जबकि पिछले वर्षों में उसका मुख्य फोकस बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु हथियारों के विकास पर रहा था।

    किम जोंग उन की पांच वर्षीय सैन्य आधुनिकीकरण योजना में परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों और पानी के भीतर से छोड़ी जा सकने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) के विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया भविष्य में अपनी समुद्री सीमाओं को लेकर भी आक्रामक रुख अपना सकता है।

    इस बीच दक्षिण कोरिया के साथ तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। किम जोंग उन कई बार पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में मौजूद Northern Limit Line (एनएलएल) को मानने से इनकार कर चुके हैं। यह समुद्री सीमा कोरियाई युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र कमान द्वारा निर्धारित की गई थी और लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का विषय रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की बढ़ती नौसैनिक और परमाणु महत्वाकांक्षाएं पूर्वी एशिया में सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना सकती हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में कोरियाई प्रायद्वीप और आसपास के समुद्री क्षेत्रों पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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