प्योंगयांग। उत्तर कोरिया नेता के किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने अपने परमाणु हथियार (Nuclear weapons) कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर परमाणु निरस्त्रीकरण (Nuclear disarmament) नहीं करेगा। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की ओर से बढ़ते दबाव के बीच किम जोंग उन के देश ने इसे “अपरिवर्तनीय रूप से अंतिम रूप दिया गया मुद्दा” बताते हुए परमाणु हथियार छोड़ने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के जरिए जारी बयान में उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देश के परमाणु हथियारों को खत्म करने की मांग करना “तर्कहीन बहस” और “हकीकत से दूर दिवास्वप्न” जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी दबाव, सैन्य धमकी या प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया की परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने वाला।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों पर भी नाराजगी जताई। इन बैठकों में प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने पर जोर दिया गया था। उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने कहा कि चाहे कितनी भी बैठकें हो जाएं या संयुक्त बयान जारी किए जाएं, डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) की परमाणु हथियार संपन्न स्थिति को बदला नहीं जा सकता।
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की आक्रामक नीतियां तथा सैन्य दबाव की रणनीति क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही है, लेकिन इससे उत्तर कोरिया अपने फैसले से पीछे हटने वाला नहीं है।
परमाणु वार्ता के बाद आया बयान
यह तीखा बयान उस समय सामने आया है, जब हाल ही में दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु परामर्श समूह (Nuclear Consultative Group) की बैठक हुई थी। बैठक में दोनों देशों ने उत्तर कोरिया के “पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण” (CVID) के लक्ष्य को दोहराया था।
चीन के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर
इसी बीच उत्तर कोरिया और चीन ने अपने कूटनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों के बीच मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि के 65 वर्ष पूरे होने के मौके पर आर्थिक, सैन्य और बुनियादी ढांचा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।
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