
इंदौर। अब इंदौर की नई जनरेशन की बच्चियों को छेडऩा मनचलों के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है। न केवल इन्हें मार्शल आर्ट में आत्मरक्षा के गुण सिखाए गए हैं, बल्कि मानसिक तौर पर मजबूती के लिए भी ट्रेनिंग दी गई है। शहर के सभी सरकारी स्कूलों में चलाए जा रहे इस ट्रेनिंग सेशन ने बच्चियों को तो आत्मबल दिया ही है, वहीं बच्चियों के इस आत्मबल को देखकर अब स्कूलों के छात्र भी गुजारिश कर रहे हैं कि उन्हें भी इस तरह की ट्रेनिंग दी जाए।
लड़कियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर इंदौर जिले में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। जिला पंचायत सीईओ की पहल पर समाजसेवी संस्था के सहयोग से बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें हर परिस्थिति में खुद की सुरक्षा करने के लिए सक्षम बनाना है। इस पहल के तहत अब तक 5000 से अधिक बच्चियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जबकि आने वाले समय में इस संख्या को और बढ़ाने की योजना है। उत्साह की बात यह है कि छात्राओं को आत्मरक्षा और आत्मबल से ओत-प्रोत होते देख छात्रों ने भी मांग की है कि उन्हें भी इस तरह की ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जाए।
आत्मरक्षा में सक्षम होंगी तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा
जिला पंचायत सीईओ आईएएस सिद्धार्थ जैन ने बताया कि आज के दौर में केवल किताबी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। समाज में बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बच्चियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब लड़कियां आत्मरक्षा में सक्षम होंगी तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी डर के अपने जीवन के फैसले ले सकेंगी। आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण की सबसे बड़ी कुंजी है। इस अभियान के अंतर्गत स्कूलों, गांवों और विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा बच्चियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें रोजमर्रा की परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं। इसमें छेड़छाड़ की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया कैसे देनी है, अनजान व्यक्ति से खतरा महसूस होने पर क्या कदम उठाने चाहिए, बेसिक मार्शल आर्ट मूव्स, हाथ-पैरों का सही इस्तेमाल, संतुलन बनाए रखना और मानसिक मजबूती जैसे विषय शामिल हैं।
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