नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rss) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश वाली हालिया रिपोर्ट को लेकर 275 से अधिक पूर्व जजों, सिविल सेवकों और सेना के पूर्व अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने ‘यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे “बौद्धिक दिवालियापन और बेतुकी सोच” का उदाहरण करार दिया।
शनिवार को जारी संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि रिपोर्ट किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया कि इस रिपोर्ट में योगदान देने वाले सभी लोगों का कड़ा बैकग्राउंड चेक कराया जाए। उनका आरोप था कि रिपोर्ट तैयार करने वालों के निजी स्वार्थ हैं, जिनका उद्देश्य भारत के लोगों के बीच उनकी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाना है।
बयान में कहा गया कि USCIRF की सिफारिश—जिसमें संपत्ति जब्त करने, भारतीय नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाने और RSS से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई—पूरी तरह से बेबुनियाद है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इसे तथ्यों के बजाय पूर्वाग्रह पर आधारित बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि USCIRF के सभी छह कमिश्नरों की नियुक्ति अमेरिकी सरकार करती है और उन्हें अमेरिकी कांग्रेस के माध्यम से टैक्सदाताओं के धन से फंडिंग मिलती है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन को चाहिए कि वह इस रिपोर्ट से जुड़े लोगों की पृष्ठभूमि की जांच कराए। उनके अनुसार, इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके धन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
संयुक्त बयान में यह चिंता भी जताई गई कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थानों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को नकारात्मक रूप में पेश करता रहा है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि बिना ठोस और व्यापक साक्ष्यों के इस तरह की टिप्पणियां करना संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
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