वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में पाकिस्तान और चीन को कूटनीतिक मोर्चे पर झटका लगा है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस (America, Britain and France) ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (Balochistan Liberation Army) और उसके गुट मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।
पाकिस्तान और चीन ने पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत BLA और मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य इन संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगवाना था।
हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसे इस्लामाबाद और बीजिंग की कूटनीतिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की थी। उनका दावा था कि BLA समेत कई उग्रवादी संगठन अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से संचालन कर रहे हैं और सीमा पार हमलों में शामिल हैं।
पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि अफगान क्षेत्र में आतंकी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका अपने घरेलू कानूनों के तहत BLA को पहले ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। अमेरिकी प्रशासन ने मजीद ब्रिगेड को भी BLA से जुड़े एक नाम के तौर पर आतंकी सूची में शामिल किया हुआ है।
इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र स्तर पर प्रतिबंध के प्रस्ताव को रोकने के फैसले ने कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से इस पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत कारण सामने नहीं आए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, BLA ने पिछले वर्षों में पाकिस्तान में कई बड़े हमलों की जिम्मेदारी ली है। इनमें सुरक्षा प्रतिष्ठानों, बंदरगाह क्षेत्रों और सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने के आरोप शामिल हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार चर्चा हो रही है।
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