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पाकिस्तान में शिया धर्मगुरू की चेतावनी, पीएम शहबाज को ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड से हटने का अल्टीमेटम

March 06, 2026

 

नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई(Iran’s Supreme Leader Ali Khamenei) की हालिया मृत्यु के बाद पाकिस्तान के शिया समाज(Pakistan’s Shia community,) के प्रमुख धर्मगुरू शेख नजफी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ(Prime Minister Shahbaz Sharif) को गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि पीएम ट्रम्प द्वारा बनाए गए गाजा पीस बोर्ड(Gaza Peace Board) से बाहर नहीं निकलते हैं, तो इसके राजनीतिक और सामाजिक (social consequences)परिणाम गंभीर और अपमानजनक होंगे।

नजफी ने गिलगित-बाल्टिस्तान में आयोजित सभा में स्पष्ट कहा, “मैं इस सभा का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं करूंगा, लेकिन एक बात जरूर कहूंगा, जो भी ‘अली-उन-वली-उल्लाह’ का कलमा पढ़ता है, मेरी बात पूरे पाकिस्तान तक पहुंचाए। अगर चुनाव और बोर्ड की स्थायी सदस्यता से पहले सरकार कदम नहीं उठाती, तो हर गली में अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों से भी अपील की कि क्या वे अपने नेता के समर्थन में अपना खून देने को तैयार हैं।

शिया धर्मगुरू की चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव जल्दी होने वाले हैं। उन्होंने मुसलिम लीग (नवाज) और उसकी सहयोगी पार्टियों को भी सीधे निशाने पर लिया और कहा कि अगर सरकार ने बोर्ड का मुद्दा तुरंत हल नहीं किया, तो उन्हें राजनीतिक और सामाजिक अपमान सहना पड़ेगा।

ट्रम्प का गाजा पीस बोर्ड अमेरिका और इजरायल के सहयोग से स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक कामकाज में सहयोग करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं को बोर्ड का स्थाई अध्यक्ष घोषित किया है, और इसमें शामिल होने वाले देशों को स्थायी सदस्यता के लिए लगभग 1 अरब डॉलर देने होंगे। पाकिस्तान ने इस बोर्ड की सदस्यता लेने के लिए हां की है, जिससे देश के अंदर और बाहर विवाद की स्थिति बन गई है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि शिया धर्मगुरू की चेतावनी और गाजा पीस बोर्ड का मुद्दा पाकिस्तान की अंतर-धार्मिक और राजनीतिक संवेदनशीलता को उजागर करता है। इस घटना से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका और इजरायल के इराक-गाजा और ईरान के खिलाफ सैन्य और राजनीतिक कदमों के प्रभाव पाकिस्तान की घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकते हैं।


  • शेख नजफी ने अपनी चेतावनी में साफ किया कि यह सरकार और सहयोगी पार्टियों के लिए है। उनका कहना है कि अगर पीएम शीहबाज शीघ्र ही बोर्ड से हटते हैं और गाजा पीस बोर्ड के विवादित पहलुओं को नजरअंदाज नहीं करते, तो राजनीतिक संकट और सामाजिक विरोध तेज हो सकता है। उनका संदेश स्पष्ट है: “शहीद खामेनेई और आने वाले नेता के साथ हमारे वादे के अनुसार कार्रवाई करें, या परिणाम भुगतने को तैयार रहें।”

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