
इंदौर। जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन व्यवस्था पूरी तरह लडख़ड़ाती नजर आ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत मिलने वाली 600 रु. की मामूली राशि भी पिछले दो महीनों से हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे लाखों पेंशनधारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन का पैसा 2 महीने से खातों में नहीं आया है, वहीं सामाजिक सुरक्षा की राशि भी एक महीने देरी से खातों में पहुंच रही है। लाड़ली बहनों को हर महीने समय पर दिए जाने वाले पैसों पर बुजुर्ग प्रश्न चिह्न लगा रहे हैं।
पेंशन के भरोसे जीवनयापन कर रहे बुजुर्ग आज अपनी ही सरकार के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हैं। जिले में करीब 28 हजार से अधिक ऐसे हितग्राही हैं, जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार की पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन उन्हें लगातार दूसरे महीने भी भुगतान नहीं मिला। स्थिति यह है कि कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन शिकायतों से पट चुकी है। हर दिन दर्जनों बुजुर्ग अपनी पीड़ा लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, समाधान नहीं।
पेंशनधारियों का साफ कहना है कि जब अन्य राज्यों में अधिक राशि और नियमित भुगतान हो रहा है तो मध्यप्रदेश में ही क्यों इतनी लापरवाही बरती जा रही है? पहले से ही 600 रुपए जैसी नगण्य राशि और वह भी समय पर न मिलना सरकार की संवेदनहीनता को उजागर करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य बुजुर्गों को सहारा देना है, वही योजनाएं आज उनके लिए परेशानी का कारण क्यों बन रही हैं? बुजुर्गों ने सामाजिक न्याय विभाग में अधिकारियों से कहा कि लाड़ली बहनें जो कमाने में सक्षम हैं, उन्हें हर महीने समय पर हमसे दोगुना भुगतान किया जा रहा है, जबकि दिव्यांगों और बुजुर्गों को महीनों तक लटकाया जा रहा है।
60 साल का होना बन रहा अपराध
लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को 1500 की राशि हर महीने दी जा रही है। वहीं जो महिलाएं 60 साल की उम्र पार कर वृद्धावस्था में शामिल हो रही हैं उन्हें इस योजना से भी बाहर किया जा रहा है। अब तक जिन महिलाओं को 1500 की राशि हर महीने मिल रही थी, अब उनके खाते में 600 रुपए भी बड़ी मुश्किल से पहुंच रहे हैं। ज्ञात हो कि योजना के तहत 60 साल तक की महिलाओं को ही लाड़ली बहना माना गया है। उसके बाद उन्हें यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
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