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यहां हंसने नहीं, खुलकर रोने आते हैं लोग, ‘क्राइ क्लब’ में आंसुओं से हल्का होता है मन, जानिए इस अनोखे ट्रेंड का सच

June 28, 2026

नई दिल्ली। तेज रफ्तार जिंदगी, काम का दबाव, रिश्तों की जिम्मेदारियां और लगातार बढ़ता तनाव (Stress) इन सबके बीच आज के समय में कई लोग अपनी भावनाओं (Emotions) को भीतर ही दबाकर जी रहे हैं। बाहर से मुस्कुराते हुए दिखने वाले कई लोग अंदर से मानसिक दबाव (Mental pressure), अकेलेपन और तनाव से जूझ रहे हैं। इसी स्थिति के बीच देश के कुछ शहरों में एक नया और अनोखा ट्रेंड तेजी से उभर रहा है, जिसे ‘क्राइ क्लब’ (Cry Club) कहा जाता है। यहां लोग हंसने या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि खुलकर रोने और अपने मन का बोझ हल्का करने के लिए इकट्ठा होते हैं।

सूरत से शुरू हुआ अनोखा ‘हीलिंग स्पेस’
गुजरात के सूरत में चल रहा हेल्दी क्राइंग क्लब पिछले करीब आठ वर्षों से लोगों को एक ऐसा सुरक्षित माहौल दे रहा है, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं। इस क्लब की खासियत यह है कि यहां किसी से यह नहीं पूछा जाता कि वह क्यों रो रहा है। कोई अपनी कहानी साझा करना चाहे तो उसका स्वागत है, और अगर कोई सिर्फ चुप रहकर आंसुओं के जरिए भावनाएं बाहर निकालना चाहता है, तो उसे भी पूरी आज़ादी दी जाती है।

भावनाओं को दबाने की आदत और मानसिक दबाव
क्लब के संस्थापक कमलेश मसालावाला का कहना है कि समाज में खासकर पुरुषों को बचपन से यह सिखाया जाता है कि रोना कमजोरी है। इसी सोच के कारण कई लोग सालों तक अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं, जो आगे चलकर मानसिक दबाव का कारण बनता है। उनका मानना है कि सुरक्षित माहौल में रोकर मन का बोझ हल्का करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।


  • शांत माहौल और भावनात्मक राहत
    इन सेशनों में शांत वातावरण, हल्का संगीत और सुकून देने वाला माहौल तैयार किया जाता है ताकि लोग सहज महसूस कर सकें। यहां आने वाले लोग अलग-अलग कारणों से जुड़े होते हैं—कोई रिश्तों की परेशानियों से, कोई नौकरी के तनाव से, तो कोई अकेलेपन और मानसिक थकान से राहत पाने के लिए पहुंचता है।

    विशेषज्ञों की राय
    मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रोना एक प्राकृतिक भावनात्मक प्रक्रिया है। लंबे समय तक तनाव और दुख को दबाकर रखने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में सुरक्षित माहौल में भावनाओं को व्यक्त करना कई लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकता है। हालांकि, लगातार मानसिक परेशानी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

    जापान से आया विचार, भारत में बढ़ता चलन
    क्राइ क्लब की अवधारणा जापान के ‘रुई-कात्सु’ (Rui-Katsu) से प्रेरित मानी जाती है, जहां लोग भावनात्मक रूप से रोने के लिए इकट्ठा होते हैं। धीरे-धीरे यह विचार दुनिया के कई देशों तक पहुंचा और अब भारत के मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और सूरत जैसे शहरों में भी ऐसे सेशन आयोजित होने लगे हैं।

    डिजिटल कनेक्टिविटी के इस दौर में, जहां लोग हर समय ऑनलाइन जुड़े रहने के बावजूद भावनात्मक रूप से अकेलापन महसूस करते हैं, वहीं ‘क्राइ क्लब’ जैसे समूह कई लोगों के लिए मानसिक राहत और अपनापन का एक नया माध्यम बनते जा रहे हैं।

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