
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War), मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में भारी अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वास्तविक रूप से कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई बार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर जनता को राहत दी है। उनके अनुसार नवंबर 2021, मई 2022 और हाल के समय में केंद्र सरकार द्वारा किए गए टैक्स कटौती के फैसलों के कारण सरकार पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर लगभग 10 रुपये का अतिरिक्त भार खुद वहन कर रही है। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिला है।
उन्होंने बताया कि अगर दुनिया के अन्य देशों से तुलना की जाए तो भारत में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी काफी सीमित रही है। पुरी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों में जापान के बाद भारत उन देशों में शामिल है, जहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में सबसे कम वृद्धि हुई है। उनका कहना था कि 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वास्तविक तौर पर कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस अतिरिक्त बोझ को सीधे उपभोक्ताओं पर न डाला जाए। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने के बावजूद देश में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
हरदीप पुरी ने संकेत दिया कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल तेल कंपनियों के पास पहले खरीदा गया महंगा कच्चा तेल मौजूद है। जैसे-जैसे कम कीमत पर खरीदा गया नया कच्चा तेल रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, वैसे-वैसे ईंधन की कीमतों में कमी आने की संभावना बढ़ सकती है।
अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश और खास रूप से सोनभद्र जिले के विकास की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सोनभद्र अब पिछड़े जिले की पहचान से बाहर निकलकर एक मॉडल जिले के रूप में उभर रहा है। जिले की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यहां बुनियादी ढांचे, सड़क, ऊर्जा तथा रोजगार के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 सालों में भारत ने आर्थिक, औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसका लाभ देश के हर क्षेत्र को मिल रहा है।
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