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UP में VIP सुरक्षा पर सियासत तेज: अखिलेश को सबसे ज्यादा सुरक्षाकर्मी, सरकार ने दिया ब्यौरा

February 22, 2026

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों  (Former chief ministers UP) की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार (State Government) ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को इस समय सबसे अधिक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध (Security Personnel available) कराए गए हैं।

सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सदन में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कुल 185 कर्मी तैनात हैं, जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित 24 कोबरा कमांडो भी शामिल हैं।



  • मायावती दूसरे स्थान पर, NSG सुरक्षा भी प्राप्त
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती को 161 सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड का सुरक्षा कवर भी मिला हुआ है, जो उच्च श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है।

    विधानसभा में उठे सवाल के बाद सामने आया विवरण
    यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के एक सदस्य ने पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा में बदलाव को लेकर सवाल उठाया। जवाब में सरकार ने कहा कि किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कमी नहीं की गई है और सभी को खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा दी जा रही है।

    अखिलेश यादव ने आंकड़ों पर उठाए सवाल
    दूसरी ओर सपा प्रमुख ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पहले उन्हें विशेष सुरक्षा कवर प्राप्त था, जिसे वर्तमान सरकार ने हटा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जा रही है और सूची में ऐसे कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है जो वास्तविक सुरक्षा ड्यूटी में नहीं हैं।

    ‘राजनाथ से ज्यादा सुरक्षा’ वाले बयान पर बढ़ी राजनीतिक बहस
    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हुई कि राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार उन्हें कई मौकों पर केंद्रीय नेताओं, जैसे राजनाथ सिंह, से भी अधिक राज्य सुरक्षा संसाधन मिले हुए बताए जा रहे हैं। इसे लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    सुरक्षा बनाम राजनीति-क्या है असली मुद्दा?

    सरकार का कहना है कि सुरक्षा पूरी तरह पेशेवर खतरा मूल्यांकन (थ्रेट परसेप्शन) पर आधारित है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिये से देख रहा है।
    विशेषज्ञ मानते हैं कि वीआईपी सुरक्षा का मुद्दा अक्सर प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है, खासकर तब जब संबंधित नेता सक्रिय राजनीति में हों।

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