
पटना । राजद नेत्री रोहिणी आचार्या (RJD leader Rohini Acharya) ने आरोप लगाया कि बिहार में सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से (In Bihar in connivance with the Government and Administration) निजी अस्पताल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं (Private Hospitals are playing with People’s Lives) ।
रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सम्राट सरकार के शासन में जानलेवा अस्पतालों को इलाजरत लोगों की जान लेने और जोखिम में डालने की खुली छूट प्राप्त है। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसे निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की भरमार है, जहां अग्निशमन के उपकरणों और बंदोबस्तों की मौजूदगी बिल्कुल ही नहीं है। सरकारी मानकों और दिशा-निर्देशों का धड़ल्ले से उल्लंघन करते ऐसे अस्पताल और नर्सिंग होम प्रदेश में हजारों की संख्या में लगभग हर शहर के गली-मोहल्ले में सरकार और प्रशासन की जानकारी में चलाए जा रहे हैं।
रोहिणी आचार्या ने लिखा कि ऐसे हादसों के बाद मुआवजे और जांच के आदेश का कोरम पूरा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है। अस्पतालों में आगलगी को रोकने के लिए सुरक्षा एवं बंदोबस्ती की बदहाली का आलम तो कुछ ऐसा है कि पिछले एक महीने में प्रदेश के सबसे बड़े व प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) में ही आग लगने की लगभग दर्जनभर घटनाएं हो चुकी हैं।
बिहार राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए हृदय विदारक घटना में अनेक मरीजों की मौत और आग में झुलसने की घटना पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का मुजफ्फरपुर नहीं जाकर दिल्ली जाना यह बताने के लिए काफी है कि बिहार में सरकार में बैठे हुए लोगों की मानवीय संवेदना समाप्त हो चुकी है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री व सरकार की मानवता के प्रति कोई हमदर्दी नहीं है।
उन्होंने कहा कि ये लोग सत्ता में बैठकर मलाई तो काटते हैं, लेकिन आम जनता की मुसीबत में भलाई के लिए उनके साथ खड़े नहीं होते हैं। सरकार में कैसे-कैसे लोग बैठे हुए हैं, यह स्पष्ट हो गया है। एजाज अहमद ने कहा कि इस तरह के मामले पर जनता दल (यू), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए के नेताओं को जवाब देना चाहिए कि क्या सरकार में बैठे हुए लोगों को हमदर्दी और संवेदना से मतलब नहीं है।
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