वाशिंगटन। अमेरिका (US) में 9/11 आतंकी हमलों के 25 साल पूरे होने के बाद एक बार फिर उन गोपनीय रिकॉर्ड (Confidential records) को सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है, जिनसे हमले में सऊदी अरब की कथित भूमिका को लेकर जानकारी सामने आ सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि वह इस मांग पर विचार करेंगे।
आयरलैंड से अमेरिका लौटने से पहले रविवार को ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन पहुंचने के बाद वह इस मामले को देखेंगे। हालांकि, उन्होंने फिलहाल यह घोषणा नहीं की है कि संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे या नहीं।
9/11 पीड़ितों के परिवार लंबे समय से सऊदी अरब से जुड़े गोपनीय रिकॉर्ड जारी करने की मांग करते रहे हैं। परिवारों का आरोप है कि सऊदी अरब में प्रभाव रखने वाले कुछ कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं ने हमले के लिए जिम्मेदार अपहरणकर्ताओं की मदद की थी।
9/11 हमलों को अंजाम देने वाले 19 अपहरणकर्ताओं में से 15 सऊदी नागरिक थे। हालांकि, सऊदी सरकार हमलों में किसी भी तरह की संलिप्तता से लगातार इनकार करती रही है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि संबंधित गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक होने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि हमले से पहले या उसके दौरान सऊदी अरब से जुड़े लोगों की क्या भूमिका थी।
9/11 में अपने परिजनों को खोने वाले लोग सऊदी अरब के खिलाफ लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में आयोजित स्मरण कार्यक्रम में पीड़ित परिवार की सदस्य टेरी स्ट्राडा ने भी राष्ट्रपति ट्रंप से इस मामले में कदम उठाने की अपील की।
स्ट्राडा ने अपने पति टॉम स्ट्राडा को 9/11 हमले में खोया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने सऊदी अरब की रक्षा को प्राथमिकता दी, जबकि उन्हें पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए था।
9/11 हमलों की 25वीं बरसी के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से संबंधित कई पुराने खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें 28 अगस्त 1998 का एक प्रेसिडेंशियल ब्रीफ भी शामिल है, जिसमें भारत का जिक्र किया गया है।
दस्तावेज के मुताबिक, ओसामा बिन लादेन कई देशों में हमले कराने की योजना बना रहा था। संभावित निशाने वाले देशों में भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया का नाम शामिल था।
हालांकि, इस दस्तावेज में भारत के किसी खास ठिकाने, हमले की संभावित तारीख या किसी विशिष्ट ऑपरेशनल प्लान का उल्लेख नहीं किया गया है।
सीआईए के सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि 9/11 हमलों से पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास ओसामा बिन लादेन और अलकायदा की गतिविधियों से संबंधित जानकारी मौजूद थी। इनमें भारत को भी संभावित निशाने वाले देशों में शामिल किया गया था।
अब 9/11 पीड़ित परिवार चाहते हैं कि हमलों से संबंधित बचे हुए गोपनीय रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाएं। ट्रंप ने फिलहाल दस्तावेज जारी करने का फैसला नहीं किया है, लेकिन परिवारों की मांग पर विचार करने की बात जरूर कही है।
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