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अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे का विवादित बयान, बोले- राजनीति में सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है

January 29, 2026

नई दिल्ली। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने लिखा है कि महाराष्ट्र की राजनीति(Maharashtra politics) ने एक बेहतरीन नेता खो दिया है। अजित पवार(Ajit Pawar) और मैंने लगभग एक ही समय में राजनीति(politics) में कदम रखा था, हालांकि हमारी जान-पहचान बहुत बाद में हुई।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री(Deputy Chief Minister) अजित पवार(Ajit Pawar) के असामयिक निधन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(Maharashtra Navnirman Sena (MNS) president) (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अजित पवार(Ajit Pawar) को अपना दोस्त बताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी(Expressing his profound grief) है। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि ऐसे समय में, जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, महाराष्ट्र ने एक असाधारण नेता खो दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इस ट्वीट में एक बड़ी बात कही है। उन्होंने लिखा, “राजनीति में स्पष्ट बोलने की कीमत(speaking frankly in politics) चुकानी होती है, पता नहीं अजीत पवार (Ajit Pawar)को कितनी चुकानी पड़ी होगी।”

कम समय में शिखर तक पहुंचे
अजित पवार(Ajit Pawar) के विमान हादसे की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया X पर मराठी में एक लंबा श्रद्धांजलि संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अजित पवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र ने एक बेबाक और सक्षम नेता खो दिया।” राज ठाकरे ने आगे लिखा, “मेरे मित्र और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति ने एक उत्कृष्ट नेता खो दिया है। हम दोनों ने लगभग एक ही समय राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि हमारी निकटता बाद में हुई, लेकिन राजनीति के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बहुत कम समय में शिखर तक पहुंचाया।”

राजनीति में बदलाव की थी गहरी समझ
उन्होंने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) भले ही पवार साहेब की राजनीतिक परंपरा से आए हों, लेकिन उन्होंने समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई और उसे पूरे महाराष्ट्र में स्थापित किया। राज ठाकरे ने 1990 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में महाराष्ट्र में तेजी से शहरीकरण हुआ। ग्रामीण क्षेत्र अर्ध-शहरी बनने लगे, लेकिन राजनीति का स्वर ग्रामीण ही बना रहा, जबकि समस्याएं शहरी होती चली गईं। उन्होंने लिखा, “अजित पवार(Ajit Pawar) को इस बदलाव की गहरी समझ थी और वे इस तरह की राजनीति को संभालने में माहिर थे। पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन दोनों क्षेत्रों का जिस तरह उन्होंने विकास किया, उसे उनके राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते हैं।”

पवार की प्रशासन पर मजबूत पकड़ थी
राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) की प्रशासन पर असाधारण पकड़ थी। उन्होंने लिखा, “वे जानते थे कि अटकी हुई फाइलों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज के दौर में जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, ऐसे नेता का जाना बेहद दुखद है। राज ठाकरे ने अजित पवार(Ajit Pawar) की बेबाकी और स्पष्टवादिता को उनकी सबसे बड़ी पहचान बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई काम नहीं हो सकता था, तो अजित पवार सामने से मना कर देते थे। और अगर हो सकता था, तो उसे पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। लोगों को झूठे वादों से बहलाना या भीड़ जुटाकर राजनीति करना उनका तरीका नहीं था।”

साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है
इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा, “राजनीति में साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है। यह बात मैं अपने अनुभव से जानता हूं और अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित पवार ने इसके लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाई होगी।” राज ठाकरे ने अजित पवार को जातिवाद से मुक्त राजनीति करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में ऐसे नेता कम होते जा रहे हैं, जो बिना जातिगत गणनाओं के काम करने का साहस रखते हों और अजित पवार उनमें सबसे आगे थे।


  • राजनीतिक विरोध, व्यक्तिगत नहीं
    राज ठाकरे ने लिखा कि महाराष्ट्र की राजनीति की एक परंपरा रही है, जहां राजनीतिक विरोध व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदला जाता था। उन्होंने अफसोस जताया कि उदार और गरिमापूर्ण राजनीतिक विरोध की यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। अपने संदेश के अंत में राज ठाकरे ने लिखा, “मेरे परिवार और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से पवार परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं। अजित पवार को भावभीनी श्रद्धांजलि।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार का असमय निधन राज्य की प्रशासनिक क्षमता, विकास की राजनीति, और सत्ता–विपक्ष के संतुलन के लिहाज से एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में कठिन होगी।

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