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Rajya Sabha elections: लोकसभा जैसी हलचल, कहीं CM बदल रहे तो कहीं गठबंधन धर्म याद आया!

March 05, 2026

नई दिल्ली। इस साल राज्यसभा (Rajya Sabha) चुनाव (elections) भी गहमागहमी के साथ हो रहे हैं. आमतौर पर द्विवार्षिक चुनाव बहुत शांतिपूर्ण तरीके से हो जाते हैं. सबको अपनी ताकत पता होती है, कहीं क्रॉस वोटिंग (cross voting) हो गई तो एक सीट और मिल जाती है. इससे ज्यादा कुछ नहीं. लेकिन बिहार हो या महाराष्ट्र इस बार हलचल ज्यादा है. बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा जाने की अटकलें तेज हैं. बिहार के एक मंत्री ने कह दिया कि नीतीश बाबू उच्च सदन जाने का फैसला खुद लेंगे. आज यानी 5 मार्च को एक मीटिंग में तय हो जाएगा कि क्या बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है?



  • हां, राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे. इसके बाद भाजपा की वो तमन्ना भी पूरी हो जाएगी, जिसकी राह वह कई साल से देख रही है. सब कुछ सेट रहा तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. आज नीतीश का नामांकन हुआ तो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा या किसी अन्य मंत्री को सीएम बनाया जा सकता है. केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की भी चर्चा है. उधर, नीतीश की तरफ से किसी जेडीयू नेता या नीतीश के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है.

    – बीजेपी से सीएम के लिए संभावित नामों में सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय, गिरिराज सिंह

    – जेडीयू के दो डिप्टी सीएम होंगे. सीएम नीतीश के बेटे निशांत कुमार और नीतीश के भरोसेमंद साथी विजय चौधरी की चर्चा

    महाराष्ट्र में गठबंधन धर्म
    राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने महाराष्ट्र से चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले को मौका दिया गया है. इसके साथ-साथ चुनावी रणनीतिज्ञ की भूमिका में उभरे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को राज्यसभा भेजने की तैयारी है. बाकी दो नाम माया चिंतामन इवानते और रामराव वाडकुटे का है. नामों को समझने से पता चलता है कि भाजपा ने कैंडिडेट सिलेक्शन में जातिगत संतुलन और वफादारी का ध्यान रखा है. माया नागपुर की महापौर रही हैं और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की करीबी मानी जाती हैं. रामराव 2019 में एनसीपी छोड़कर भाजपा में आए थे. अंदरखाने कहा जा रहा है कि चारों उम्मीदवारों के चयन में गठबंधन धर्म निभाया गया है.

    दरअसल, महाराष्ट्र से सात सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है. भाजपा के चारों कैंडिडेट का चुना जाना लगभग तय है. इवानते, वाडकुटे और तावड़े क्रमश: अनुसूचित जनजाति, अनसूचित जनजाति और मराठा समुदाय से आते हैं. आठवले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष हैं. एनडीए के सहयोगी हैं और अनुसूचित जाति से आते हैं. वह 2016 से मंत्री हैं. 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से नाराज होकर वह भाजपा के गठबंधन में चले आए थे.

    शिवसेना और एनसीपी 1-1 उम्मीदवार को उच्च सदन भेज सकती हैं. सातवीं सीट विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी को मिलेगी.

    कांग्रेस का खेमा भी गठबंधन धर्म निभा रहा
    हां, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (SP) के चीफ शरद पवार को राज्यसभा का नया टर्म मिलना तय है. कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र से विपक्षी गुट के कैंडिडेट के तौर पर सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया है. यह सीट 16 मार्च को होने वाले संसद के उच्च सदन के चुनावों में विपक्षी गुट जीत सकता है. महा विकास अघाड़ी (MVA) कैंडिडेट को लेकर कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं. तीनों सहयोगी पार्टियों यानी कांग्रेस, NCP (SP) और शिवसेना (UBT) ने इस अकेली सीट पर दावा किया था जिसे गठबंधन विधानसभा में अपनी ताकत के हिसाब से जीत सकता है.

    उद्धव और राहुल को किसने मनाया
    हां, शरद पवार के नाम पर विपक्षी गठबंधन के एकजुट होने की इनसाइड स्टोरी है. पवार ने आखिरी समय में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई. इसके बाद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कांग्रेस को मनाया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस के टॉप नेताओं से बात की. महाराष्ट्र कांग्रेस ने सुले के प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकमान को फोन लगाया. मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से बात हुई. आखिर में तय हुआ कि शरद पवार का सब सपोर्ट करेंगे. सुले आगे उद्धव ठाकरे से भी मिलीं. चर्चा थी कि उद्धव अपने बेटे आदित्य ठाकरे को राज्यसभा भेजना चाहते थे. आखिर में सबने गठबंधन धर्म निभाने का फैसला किया.

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