
नई दिल्ली। देश के तीन राज्यों बिहार (Bihar), हरियाणा (Haryana) और ओडिशा (Odisha) की कुल 11 राज्यसभा सीटों (Rajya Sabha Seats) के लिए आज सोमवार को मतदान (Voting) हो रहा है। इन सीटों पर तय संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव दिलचस्प हो गया है। बिहार की पांचवीं सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है। वहीं हरियाणा और ओडिशा में क्रॉस वोटिंग की आशंका ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तीनों राज्यों में मिलाकर बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जबकि हरियाणा और ओडिशा में राजनीतिक समीकरणों के चलते नतीजे रोचक हो सकते हैं।
बिहार की पांचवीं सीट पर कड़ा मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने नितिन नबीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जेडीयू की ओर से रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार चुनाव लड़ रहे हैं। एनडीए ने पांचवें उम्मीदवार के रूप में उपेंद्र कुशवाहा को उतारा है।
वहीं महागठबंधन की ओर से राजद ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास विधानसभा में 202 विधायक हैं, जिससे भाजपा और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि पांचवीं सीट के लिए उपेंद्र कुशवाहा को अतिरिक्त तीन वोटों की जरूरत होगी।
दूसरी ओर राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को जीत के लिए छह अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। एआईएमआईएम के पांच विधायकों ने राजद को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि बसपा विधायक सतीश यादव भी महागठबंधन के साथ नजर आ रहे हैं। ऐसे में पांचवीं सीट का मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है।
ओडिशा में चौथी सीट पर टक्कर
ओडिशा की चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उतारा है, जबकि दिलीप रे को भी पार्टी का समर्थन प्राप्त है। बीजेडी ने संतृप्त मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा का समर्थन किया है। यहां एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 30 विधायकों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के पास 79 विधायक और तीन निर्दलीय का समर्थन है। ऐसे में उसके दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
बीजेडी के पास 48 विधायक हैं, जिससे वह एक सीट आसानी से जीत सकती है। बची हुई सीट के लिए भाजपा समर्थित दिलीप रे और कांग्रेस समर्थित दत्तेश्वर मिश्रा के बीच मुकाबला माना जा रहा है। हालांकि क्रॉस वोटिंग की आशंका और बीजेडी के कुछ विधायकों के बागी रुख के कारण समीकरण बदल सकते हैं।
हरियाणा में दूसरी सीट पर मुकाबला
हरियाणा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से कर्मवीर बौद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं सतीश नांदल निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जिन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन जरूरी है। विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 48 और कांग्रेस के 37 विधायक हैं। इसके अलावा दो विधायक इनेलो और तीन निर्दलीय हैं।
संख्याबल के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-एक सीट जीत सकती हैं। हालांकि पिछले चुनावों में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ था। इसी वजह से इस बार भी पार्टी सतर्क है और अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। इन तीनों राज्यों में मतदान के बाद ही साफ होगा कि किस दल की रणनीति सफल होती है और किसे राजनीतिक झटका लगता है।
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