अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) की जांच लगातार तेज होती जा रही है। सोमवार को विशेष जांच टीम (SIT) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की और उनका विस्तृत बयान दर्ज किया। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने चढ़ावा प्रबंधन, प्रशासनिक निर्णय, कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण समेत कई मुद्दों पर सवाल किए।
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के बयान का मिलान अब अन्य गवाहों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों से किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए भी बुलाया जा सकता है।
एसबीआई अधिकारियों से भी पूछताछ
जांच के सिलसिले में पुलिस भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अयोध्या धाम शाखा भी पहुंची। यहां शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों से पूछताछ की गई। अधिकारियों ने मंदिर में जमा होने वाले चढ़ावे से जुड़े दस्तावेज, आरोपियों के बैंक खातों का विवरण और पिछले पांच वर्षों का बैंक स्टेटमेंट भी मांगा है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा, पदाधिकारी गोपाल राव सहित करीब 70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसी करीब 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा गणना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लगभग 30 लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और कई लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी जांच कर रही है।
न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ी
मामले में गिरफ्तार टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश, अवनीश और सुभाष श्रीवास्तव को सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी।
चंपत राय बोले- जानकारी मिलते ही कार्रवाई की
पूछताछ के दौरान चंपत राय ने पुलिस से कहा कि चढ़ावा चोरी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही उन्हें अनियमितताओं की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को पकड़वाया और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कराई।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चढ़ावे की व्यवस्था में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसकी जिम्मेदारी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा थी। टिन्नू यादव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से ट्रस्ट से जुड़ा था और उनसे ऐसी हरकत की उम्मीद नहीं थी।
पुलिस ने जब कर्मचारियों की नियुक्ति और रिश्तेदारों या परिचितों को काम दिए जाने को लेकर सवाल किया, तो चंपत राय ने कहा कि जरूरतमंद लोगों को रोजगार दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भी इसमें भूमिका थी। उन्होंने इस संदर्भ में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का भी उल्लेख किया।
आरएमओ का तबादला, निगरानी व्यवस्था जांच के घेरे में
जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि परिसर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला कर उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। मंदिर परिसर और चढ़ावा गणना कक्ष में लगे करीब 1,600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी।
सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चोरी की घटना सामने आने के बाद निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है। अर्जुन देव से एसआईटी पहले ही पूछताछ कर चुकी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उनका तबादला कई बार आदेशित होने के बावजूद 17 वर्षों तक अयोध्या में तैनाती कैसे बनी रही।
बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला
इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों की ओर से कोई भी अधिवक्ता पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले वकील पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने यह भी मांग की है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव अयोध्या छोड़ें। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो संगठन आगे आंदोलन की रणनीति बनाएगा।
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