
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र (Resignation Letter) से चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस पत्र में दोनों ने स्वीकार किया है कि चोरी की घटना सामने आने के बाद संबंधित लोगों से 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस दिलाए गए थे। साथ ही उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की सिफारिश और स्वयं को ट्रस्ट के कार्यों से अलग करने का निर्णय भी पत्र में दर्ज किया है।
इस्तीफा पत्र के अनुसार, 8 जून से दानपात्र की राशि की गणना को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगी थीं, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति बन रही थी। पत्र में उल्लेख है कि 4 जून की रात दानपात्र की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित चोरी किए जाने की जानकारी एक ट्रस्टी को मिली। इसके बाद 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें कुछ संदिग्धों की पहचान हुई।
एफआईआर से पहले कराई पूछताछ, लौटाए गए 81 लाख रुपये
पत्र में कहा गया है कि तत्काल पुलिस में मामला दर्ज कराने के बजाय पहले संबंधित युवकों से पूछताछ की गई। इस प्रक्रिया के दौरान 5 जून की रात से 8 जून के बीच आरोपित युवकों और उनके परिजनों ने ट्रस्ट को 81 लाख रुपये वापस कर दिए। साथ ही उन्होंने लिखित रूप में चोरी स्वीकार करने का भी दावा किया गया है।
विवाद बढ़ने पर सरकार से SIT जांच की मांग
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा कि जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने लगा, तब ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और सभी पक्षों की प्रतिष्ठा बनी रहे। सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए 15 जून से SIT जांच शुरू कर दी।
ट्रस्ट के कार्यों से अलग होने का फैसला
इस्तीफे के अंतिम भाग में दोनों पदाधिकारियों ने लिखा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आने तक वे ट्रस्ट के सभी कार्यों से स्वयं को अलग रखना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को त्यागपत्र सौंपा। ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक में दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए।
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