
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress-TMC) के सांसदों ने पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) की कल्याणकारी पहलों की जानकारी देने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) से मिलने का समय मांगा था। हालांकि सूत्रों के अनुसार गुरुवार को राष्ट्रपति भवन ने ‘समय की कमी’ का हवाला देते हुए उनके इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। यह घटनाक्रम उस विवाद के ठीक बाद सामने आया है, जिसमें शनिवार को राष्ट्रपति ने बागडोगरा हवाईअड्डे पर उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) या उनके किसी भी कैबिनेट मंत्री के उपस्थित न होने पर गहरी निराशा व्यक्त की थी। राष्ट्रपति वहां एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने पहुंची थीं।
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 12-15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा था, जिसमें पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा के सांसद और पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के ‘समावेशी विकास’ के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी राष्ट्रपति के साथ साझा करना था।
राष्ट्रपति भवन का जवाब
राष्ट्रपति भवन ने टीएमसी को सूचित किया कि उनके अनुरोध पर विचार किया गया है, लेकिन समय के अभाव के कारण इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी ने इसके बाद फिर से राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र लिखकर अगले सप्ताह का समय मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
यह बड़ा राजनीतिक विवाद शनिवार को तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाली आदिवासी समुदाय के एक सम्मेलन में लोगों की कम उपस्थिति पर नाराजगी जताई। राष्ट्रपति ने राज्य सरकार द्वारा कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से बागडोगरा हवाईअड्डे के पास शिफ्ट करने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या प्रशासन को यह उम्मीद थी कि कोई भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएगा।
उन्होंने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य का कोई भी मंत्री हवाईअड्डे पर उनकी अगवानी करने नहीं आया। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है और दोनों पक्षों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ‘भाजपा की सलाह पर’ बोल रही हैं। उन्होंने मणिपुर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों पर हुए कथित अत्याचारों पर राष्ट्रपति की ‘चुप्पी’ पर भी सवाल खड़े किए।
भाजपा ने राष्ट्रपति के ‘अपमान’ के लिए टीएमसी सरकार की कड़ी आलोचना की। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को शर्मनाक और अभूतपूर्व करार देते हुए सत्तारूढ़ टीएमसी पर राजनीतिक शिष्टाचार की सारी हदें पार करने का आरोप लगाया।
चुनावी माहौल में गरमाई राजनीति
इस विवाद ने चुनाव की ओर बढ़ रहे पश्चिम बंगाल का सियासी पारा और अधिक बढ़ा दिया है। राज्य में लगातार तीन बार से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को अब मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है।
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