
बैंक को तीन महीने पहले ही लग गई थी दान चोरी की भनक… ट्रस्टियों ने चोर गणनाकर्मियों को ढाल बनकर बचाया
अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) चंदा चोरी (Theft of Donation Money) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने याचिका दायर की थी जिसमें राम मंदिर को दान में मिली नकदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की हेरा फेरी के आरोपों में संज्ञान लेने की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले की तत्काल सुनवाई की क्या आवश्यकता है। मामले में जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की ही जा रही है और प्रकरण दर्ज करने के साथ गिरफ्तारी भी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में अवकाश के चलते 12 जुलाई के बाद इस मामले में सुनवाई की जा सकती है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जानकारी एसबीआई को तीन माह पहले ही हो गई थी। बैंक ने गणनाकर्मियों को हटाने की सिफारिश भी की थी और बैंक आउटसोर्सिंग कंपनी के गणनाकर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने वाली थी लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारी ढाल बनकर खड़े हो गए और किसी को भी हटाने नहीं दिया। गणनाकर्मियों की भर्ती बैंक ने आउट सोर्सिंग कंपनी से कराई थी, लेकिन ट्रस्टियों की सिफारिश पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के रिश्तेदार और करीबियों को ही गणनाकर्मी बना दिया गया। मतलब सैलेरी बैंक देता था, लेकिन कर्मी ट्रस्ट के लोग थे। जब बैंक को गणना में चोरी की भनक लगी तो उन्हें हटाने की कोशिश की, लेकिन चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव उनकी ढाल बन गए।
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