नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को रुपये की गिरावट और बढ़ती ईंधन कीमतों (fuel prices) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आशंका जताई कि देश में महंगाई की नई लहर आने वाली है और सरकार के पास इससे निपटने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 के करीब पहुंच रहा है, जबकि औद्योगिक ईंधन की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उनके मुताबिक ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली महंगाई के स्पष्ट संकेत हैं। हाल ही में रुपया 64 पैसे गिरकर 93.53 के स्तर पर पहुंचा, जिसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत पर पड़ेगा। राहुल गांधी के अनुसार रुपये की कमजोरी और ईंधन महंगाई के चार बड़े प्रभाव होंगे—उत्पादन और परिवहन लागत में वृद्धि, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों पर दबाव, रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी से शेयर बाजार पर असर। उन्होंने कहा कि इन सबका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इन संकेतों को नजरअंदाज कर रही है और सिर्फ बयानबाजी कर रही है। उनका दावा है कि चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चुनावी मौसम में कीमतों को स्थिर रखकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है, लेकिन मतदान के बाद ईंधन महंगा हो सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।” इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी रुपये की गिरावट को वैश्विक कारणों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से ईंधन करों में कटौती की मांग की है।
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