
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) एक जनवरी को महात्मा गांधी पर एक नयी पुस्तक का विमोचन करेंगे जिसमें लिखा है कि गांधीजी की 1909 की रचना हिंद स्वराज’ ‘धर्म’ यानि सही मार्ग चुनने को लेकर है जिसका अक्सर लेकिन अपर्याप्त तरीके से आस्था अथवा मकाहब के रूप में अनुवाद किया जाता है।
लेखक द्वय जे के बजाज और एम डी श्रीनिवास ने कहा कि उनकी पुस्तक ‘मेकिंग ऑफ ए हिंदू पैट्रियट: बैकग्राउंड ऑफ गांधीजीस हिंद स्वराज’ 1909 में गांधी जी की हस्तलिखित गुजराती पांडुलिपि पर आधारित कृति हिंद स्वराज’ और 1910 में फिनिक्स द्वारा प्रकाशित उसके पाठ के अंग्रेजी अनुवाद के एक प्रामाणिक संस्करण तैयार करने के प्रयासों से निकली है। लेखकों ने कहा कि उन्होंने धार्मिक देशभक्ति के पाठ के रूप में ‘हिंद स्वराज’ के उदय की कहानी को और हिंदू देशभक्त के रूप में गांधीजी की कहानी को कहने का प्रयास किया है
सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के संस्थापक निदेशक बजाज और इसके संस्थापक अध्यक्ष श्रीनिवास ने कहा कि हम इस कहानी को व्यापक रूप से उनके ही शब्दों में कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी हमेशा खुद को हिंदू मानते थे, शायद अन्य अधिकतर लोगों से बेहतर हिंदू। और उनके समकालीन अन्य लोग भी उन्हें ऐसे ही देखते थे। भागवत ने इससे पहले फरवरी में गांधी स्मृति संग्रहालय में एक और पुस्तक का विमोचन किया था। तब उन्होंने गांधी को ‘कट्टर सनातनी ङ्क्षहदू’ कहा था जो अपनी आस्था के साथ दूसरों की आस्थाओं का भी सम्मान करते थे।
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